हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश में नेपाली नागरिक शिरंजना बुद्धा को नियमित जमानत दे दी। कोर्ट ने पुलिस द्वारा एक बड़ी अफीम बरामदगी को संभालने के तरीके में कई चिंताजनक खामियां पाईं। यह आदेश एफआईआर संख्या 86/2025 में पारित हुआ, जिसमें पुलिस ने दावा किया था कि उन्हें एक बस से 8 किलो से अधिक अफीम मिली थी।
Background (पृष्ठभूमि)
प्रोसिक्यूशन के अनुसार, पुलिस ने 27 अप्रैल को ‘गुप्त सूचना’ के आधार पर सोलन-शिमला रूट की एक बस को रोका और दो बैग पाए-एक शिरंजना बुद्धा के पैरों के पास और दूसरा उनके सह-अभियुक्त शंकर बहादुर के पास। इन बैगों में कुल 8.184 किलोग्राम अफीम होने का दावा किया गया।
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रक्षा पक्ष ने तर्क दिया कि बैग उनकी विशेष कब्जे में नहीं थे और गिरफ्तारी के आधार भी उन्हें बताए नहीं गए। उन्होंने यह भी कहा कि वजन में विरोधाभास और नौ पाउच को एक साथ मिलाने से पूरी बरामदगी संदेहास्पद हो जाती है।
Court’s Observations (कोर्ट की टिप्पणियाँ)
न्यायाधीश ने रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण किया, और अदालत के माहौल से साफ था कि पुलिस की कहानी कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी नोट किया कि स्टेटस रिपोर्ट यह तक नहीं बताती कि बरामद सामग्री को राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था या नहीं।
इन गंभीर चूकों पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि सभी पाउच को मिलाकर सैंपल लेना NDPS मामलों में आवश्यक "प्रतिनिधि नमूना" की अवधारणा को ही समाप्त कर देता है। कोर्ट ने कहा-“पैकेट्स को अलग-अलग भेजकर यह पता नहीं लगाया गया कि उनमें अफीम थी भी या नहीं,” और यह कि ऐसी त्रुटियाँ यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल बना देती हैं कि याचिकाकर्ता वाणिज्यिक मात्रा की अफीम के कब्जे में थीं।
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कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि बुद्धा का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, जांच पूरी हो चुकी है और 22 गवाहों के कारण ट्रायल जल्दी खत्म होने की संभावना नहीं है। अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता को हिरासत में रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।”
Decision (निर्णय)
जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने बुद्धा को ₹1,00,000 के बॉन्ड और दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही कड़े निर्देश दिए गए-जांच में सहयोग करना होगा, गवाहों को डराना नहीं होगा, पासपोर्ट जमा करना होगा, और अपना मोबाइल तथा सोशल मीडिया विवरण पुलिस व कोर्ट को देना होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट चेतावनी दी गई कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
Case Title: Shiranjana Buddha vs. State of Himachal Pradesh
Case Number: Cr. MP (M) No. 2439 of 2025
Decision Date: 24 November 2025