सुप्रीम कोर्ट ने UPSRTC मामले में अबेटमेंट हटाकर सब्स्टीट्यूशन याचिका स्वीकार की, अनसर्व्ड पक्षों पर नोटिस के लिए दो सप्ताह का समय दिया

By Vivek G. • November 28, 2025

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम एवं अन्य बनाम ओम सरन गुप्ता एवं अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने UPSRTC मामले में अबेटमेंट हटाकर सब्स्टीट्यूशन मंजूर किया, दो सप्ताह में अनसर्व्ड प्रतिवादियों पर नोटिस सेवा पूरी करने का निर्देश।

13 नवंबर 2025 को हुए एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण इन-चैंबर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) द्वारा दायर दो जुड़ी हुई याचिकाओं पर विचार किया। सुनवाई-न्यायमूर्ति अरविंद कुमार के समक्ष-मुख्य रूप से प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ियों, देरी और मृत पक्षों के कानूनी उत्तराधिकारियों को रिकॉर्ड पर लाने की आवश्यकता पर केंद्रित थी। भले ही सुनवाई ज्यादा लंबी नहीं चली, लेकिन न्यायालय की टिप्पणियों से यह संकेत मिला कि लम्बे समय से लंबित मामलों में अदालत अब तेज़ी की अपेक्षा कर रही है।

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Background (पृष्ठभूमि)

यह विवाद दो स्पेशल लीव पिटीशन्स (SLP Nos. 29455/2024 और 31072/2024) से जुड़ा है, जिनमें UPSRTC ने अपने खिलाफ पारित पूर्व आदेशों को चुनौती दी है। कई प्रतिवादियों और कार्यवाही के दौरान कुछ की मृत्यु होने के कारण, याचिकाकर्ताओं को कानूनी उत्तराधिकारियों को शामिल करना अनिवार्य था-जो अपील को जीवित रखने के लिए ज़रूरी कदम है।

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लेकिन प्रक्रिया में देरी हुई। याचिकाकर्ताओं ने विलंब माफी और अतिरिक्त दस्तावेज़ दाखिल करने की अनुमति मांगी। दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष-जिन्हें अलग-अलग वकील प्रतिनिधित्व कर रहे थे-किसी भी ऐसी बात का विरोध कर रहे थे जो मामले को और लंबा कर दे।

सुनवाई कक्ष के बाहर एक वकील ने हल्के अंदाज़ में कहा, “ऐसे ट्रांसपोर्ट वाले मामले सालों खिंच जाते हैं, विवाद की वजह से नहीं, कागज़ात की वजह से।”

Court’s Observations (अदालत की टिप्पणियाँ)

संक्षिप्त इन-चैंबर सत्र के दौरान, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने व्यावहारिक रवैया अपनाया। उन्होंने माना कि देरी आदर्श नहीं थी, लेकिन मामले को आगे बढ़ाने के लिए इसे माफ किया जा सकता है। अदालत में मौजूद एक वकील के अनुसार, “पीठ ने कहा, ‘सिर्फ प्रक्रिया में देरी की वजह से न्याय का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।’”

अदालत ने पहले अबेटमेंट-यानी कानूनी कार्यवाही का स्वतः समाप्त हो जाना-के मुद्दे पर गौर किया। यहाँ कई प्रतिवादियों के संबंध में अबेटमेंट पहले ही हो चुका था। न्यायाधीश ने इसे हटाने का निर्णय लिया, जिससे याचिकाकर्ता मामले को सही तरीके से आगे बढ़ा सकें।

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अदालत ने सब्स्टीट्यूशन का आवेदन स्वीकार किया, लेकिन एक हल्की-सी शर्त के साथ। “पीठ ने कहा, ‘सब्स्टीट्यूशन की अनुमति दी जाती है, परंतु SCAORA को 1000 रुपये लागत के भुगतान के साथ,’” जो इस बात का संकेत था कि समयसीमा का पालन आवश्यक है।

न्यायालय ने अनसर्व्ड प्रतिवादियों का भी ज़िक्र किया। प्रतिवादी नंबर 2, 4 और 9 को नोटिस सही तरीके से नहीं भेजा गया था, इसलिए अदालत ने सेवा पूर्ण करने के लिए दो और सप्ताह का समय दिया। इसके अलावा, मृत प्रतिवादी नंबर 3 और 8 के कानूनी उत्तराधिकारियों को भी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।

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Decision (निर्णय)

सुनवाई के अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ स्पष्ट निर्देश पारित किए:

  • देरी को माफ किया गया, जिससे याचिकाएँ आगे बढ़ सकें।
  • अबेटमेंट हटाया गया, जिससे मृत प्रतिवादियों के विरुद्ध मामला फिर से खुल सका।
  • सब्स्टीट्यूशन की अनुमति दी गई, लेकिन SCAORA को 1000 रुपये लागत जमा करने की शर्त पर।
  • अनसर्व्ड प्रतिवादियों पर नोटिस सेवा पूर्ण करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया।
  • मृत प्रतिवादी नंबर 3 और 8 के कानूनी उत्तराधिकारियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।
  • संबद्ध याचिका (SLP 31072/2024) के लिए न्यायालय ने निर्देश दिया कि रजिस्ट्री इसे उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करे

इस प्रकार, न्यायालय ने दिन की कार्यवाही समाप्त की और मामले को फिलहाल प्रक्रिया संबंधी दायरे में ही सीमित रखा।

Case Title: Uttar Pradesh State Road Transport Corporation & Anr. vs. Om Saran Gupta & Ors.

Case No.: SLP(C) No. 29455/2024 with SLP(C) No. 31072/2024

Case Type: Special Leave Petition (Civil)

Decision Date: 13 November 2025

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