सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रेलवे की नई सुरक्षा रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ते हुए सरकार से और स्पष्ट तथा ठोस योजना पेश करने को कहा। कोर्टरूम असामान्य रूप से गंभीर माहौल में भरा हुआ था, और यह बात साफ दिख रही थी कि यह केवल एक साधारण म Miscellaneous मामला नहीं रहेगा। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच खास तौर पर दो सुरक्षा मुद्दों और ऑनलाइन-ऑफलाइन टिकट बीमा के फर्क को लेकर काफी चिंतित दिखी।
Background (पृष्ठभूमि)
यह मामला पहले दायर की गई अपीलों से जुड़ा है, जिनमें रेलवे और भारत सरकार की यात्री सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों पर सवाल उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी रेलवे की ओर से उपस्थित रहे, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता शिखिल सूरी अमिकस क्यूरी के रूप में अदालत की सहायता कर रहे थे।
रेलवे ने एक नई रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कई सुरक्षा पहलुओं का जिक्र था। लेकिन बहस शुरू होते ही साफ हो गया कि बेंच उसकी प्राथमिकताओं और विशेषकर उसकी समयसीमा से संतुष्ट नहीं है।
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Court’s Observations (अदालत की टिप्पणियां)
बहस उस वक्त दिलचस्प हो गई जब ASG ने कहा कि रिपोर्ट में जिन मुद्दों को चिन्हित किया गया है, “उन्हें रेलवे की प्राथमिकताओं की सूची न समझा जाए,” बल्कि वे सिर्फ ऐसे बिंदु हैं जिन्हें विभाग अदालत के ध्यान में लाना चाहता था। यह स्पष्टीकरण बेंच को संतुष्ट नहीं कर पाया।
बेंच ने टिप्पणी की, “प्रारंभिक स्तर पर ध्यान ट्रैकों और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर होना चाहिए, बाकी पहलू वहीं से निकल आएंगे।”
सुनवाई का सबसे ध्यान खींचने वाला हिस्सा तब आया जब अमिकस ने बताया कि ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को दुर्घटना बीमा मिलता है, लेकिन ऑफलाइन टिकट खरीदने वालों को नहीं। कोर्टरूम में कई लोग एक-दूसरे की ओर देखने लगे—यह जानकारी कुछ वकीलों के लिए भी नई थी।
जस्टिस अमानुल्लाह ने स्पष्ट आश्चर्य प्रकट किया। बेंच ने कहा कि इस तरह का अंतर “स्पष्ट स्पष्टीकरण” मांगता है और ASG को निर्देश दिया कि वह इस पर विस्तृत जानकारी लेकर वापस आएं।
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जजों ने यह भी कहा कि रेलवे ने कई प्रस्ताव तो दिए हैं, लेकिन किसी भी प्रस्ताव के साथ पक्की समयसीमा नहीं जोड़ी गई। एक जज ने अनौपचारिक अंदाज में कहा, “अगर आप सुझाव देते हैं, तो यह भी बताना होगा कि उसे लागू करना कब शुरू करेंगे।”
Decision (निर्णय)
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया कि वह एक बेहतर और अधिक केंद्रित हलफनामा दाखिल करे, जिसमें विशेष रूप से—
- रिपोर्ट के मुद्दा संख्या 3 और 7 (ट्रैक और क्रॉसिंग सुरक्षा से जुड़े दोनों बिंदु),
- और ऑनलाइन-ऑफलाइन बीमा असमानता
पर स्पष्ट जवाब शामिल हों।
कोर्ट ने रेलवे को बाकी सुधार योजनाएँ जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन साफ संकेत दिया कि ये तीन मुद्दे अब और देर नहीं झेल सकते।
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अब यह मामला 13 जनवरी 2026 को फिर से सुना जाएगा, और केस सूची में इसकी वही स्थिति बरकरार रहेगी। रेलवे को अगले कुछ सप्ताह में अधिक संतोषजनक उत्तर देना होगा।
Case Title: Union of India vs. Radha Yadav
Case No.: MA Nos. 741–742/2019 in C.A. Nos. 1265–1266/2019; MA Nos. 743–744/2019 in C.A. Nos. 1267–1268/2019
Case Type: Miscellaneous Application in Civil Appeals
Decision Date: 25 November 2025