नई दिल्ली, 24 नवंबर - सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कुछ ही मिनटों की रही, लेकिन कोर्ट नंबर 1 में माहौल गंभीर था। मणिपुर हिंसा से जुड़ी याचिका अंततः प्रक्रियागत अड़चनों को पार कर बेंच के सामने पहुंची, और पत्रकारों ने अदालत में एक तात्कालिकता महसूस की।
वनरमपानी और अन्य की ओर से दायर यह याचिका पहले रिफाइलिंग में खामियों के कारण अटकी रही - अदालत की प्रक्रिया से अनभिज्ञ पक्षकारों के लिए यह आम लेकिन परेशान करने वाली बाधा है। याचिका मणिपुर हिंसा की जांच की प्रगति से संबंधित अपडेट मांगती है, जो वर्तमान में राष्ट्रीय जांच एजेंसी के पास है।
Read also: लगभग तीन साल जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आगरा के युवक को दी जमानत, इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की बेंच ने बात को घुमा-फिराकर नहीं कहा। एक वकील ने कोर्ट रूम के बाहर बताया, “लोगों को चुप्पी नहीं, स्पष्ट जानकारी चाहिए।” वहीं एक अन्य ने याद किया, “बेंच ने कहा था, ‘हमें जानना है कि वास्तव में कितनी प्रगति हुई है।’”
अंततः कोर्ट ने देरी को माफ किया, केंद्र सरकार और NIA को नोटिस जारी करते हुए विशेष रूप से जांच की प्रगति बताने को कहा, और 12 जनवरी 2026 की तारीख जवाब के लिए तय की। साथ ही दस्ती सेवा की भी अनुमति दी गई।
Case Title: Vanrampani & Others vs Union of India & Another
Case No.: Writ Petition (Criminal) Diary No. 44574/2025
Case Type: Criminal Writ Petition
Decision Date: November 24, 2025