सुप्रीम कोर्ट ने NHRC की कुष्ठ रोग सलाह पर ठोस सुझाव मांगे; राज्यों को 17 दिसंबर से पहले रिपोर्ट जमा करने का निर्देश

By Vivek G. • November 25, 2025

फेडरेशन ऑफ लेपि. ऑर्गन. (एफओएलओ) एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने NHRC की नई कुष्ठ रोग सलाह पर राज्यों से ठोस रिपोर्ट मांगी और 17 दिसंबर 2025 की अगली सुनवाई से पहले कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।

बुधवार को एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को यह स्पष्ट संकेत दिया कि अब समय आ गया है कि वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की नई सलाह-जो कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों से संबंधित है-पर अपनी स्पष्ट, व्यावहारिक राय रखें। करीब 15 साल से लंबित यह मामला एक बार फिर असाधारण रूप से भरी हुई कोर्टरूम में सुना गया, जहां कई राज्यों और मंत्रालयों के वकील मौजूद थे। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने साफ कहा कि अब “सिर्फ व्यापक बयान” नहीं, बल्कि कारगर सुझाव चाहिए।

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पृष्ठभूमि

2010 में दायर मूल याचिका और बाद की याचिकाओं को फेडरेशन ऑफ लेपी. ऑर्गन. (FOLO) और अन्य याचिकाकर्ताओं ने दाखिल किया था, जिनमें भेदभाव, पुनर्वास की कमी और कुष्ठ रोग प्रभावित लोगों के लिए मजबूत नीतियों की आवश्यकता उठाई गई थी। वर्षों में कोर्ट कई बार निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन राज्यों में कार्यान्वयन असमान रहा, जिसके चलते कोर्ट कई बार एकरूप नीति की मांग दोहराता रहा है।

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इसी वर्ष, 30 जुलाई 2025 को कोर्ट ने NHRC को राष्ट्रीय स्थिति का मूल्यांकन कर एक संपूर्ण रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। यह रिपोर्ट, जो सैकड़ों पन्नों की है, इस सप्ताह पीठ के सामने रखी गई। इसमें पहचान, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक कलंक खत्म करने के लिए विस्तृत सलाह शामिल है-वे मुद्दे जिन पर कार्यकर्ता वर्षों से ध्यान दिलाते आए हैं।

कोर्ट की टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान पीठ ने NHRC की “बहुत व्यापक रिपोर्ट” को स्वीकार किया और उसकी सराहना भी की, लेकिन यह भी कहा कि अब इन सिफ़ारिशों को असली प्रशासनिक कार्रवाई में बदलना ज़रूरी है।

पीठ ने कहा, ‘रिपोर्ट विस्तृत है, लेकिन हमें सभी पक्षों से यह स्पष्टता चाहिए कि किन क्षेत्रों में अब भी न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।’

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जस्टिस सूर्यकांत ने अनौपचारिक टिप्पणी में कहा कि सलाह अच्छी है, लेकिन केंद्र और राज्यों से स्पष्ट प्रतिबद्धता के बिना “यह सिर्फ दस्तावेज़ों का एक और गुच्छा बनकर रह सकती है।” इस टिप्पणी पर वकीलों के बीच हल्की हलचल दिखी, क्योंकि कई लोग जानते थे कि राज्यों में कुष्ठ रोग से संबंधित कल्याण योजनाओं में भारी असमानता है।

कोर्ट ने दर्जनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वकीलों की उपस्थिति नोट की और उन्हें याद दिलाया कि असली काम अब समन्वय में है। आदेश में भी साफ लिखा गया कि राज्य वक़ीलों को अपने “संक्षिप्त कार्रवाई रिपोर्ट” सॉफ्ट कॉपी में भेजनी होंगी ताकि उन्हें केंद्रीकृत रूप से संकलित किया जा सके।

दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट ने इन रिपोर्टों को संकलित करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पक्ष की वकील Ms. रश्मि नंदकुमार को सौंपी, जिन्होंने सहमति दी। यह कुछ असामान्य कदम इस बात का संकेत है कि कोर्ट अब देर-सवेर से उलझना नहीं चाहता और प्रक्रिया को तेज़ रखना चाहता है।

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निर्णय

अपने मुख्य निर्देशों में, कोर्ट ने कहा कि NHRC रिपोर्ट की एक प्रति सभी वकीलों को दी जाए ताकि वे उन बिंदुओं की पहचान कर सकें जिन पर न्यायालय को भविष्य में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है और आपसी बातचीत के बाद अपने सुझाव प्रस्तुत करें। आगे, सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के वकीलों को अपने एक्शन-टेकन रिपोर्ट सीधे Ms. नंदकुमार के ई-मेल पर भेजनी होंगी ताकि वे इन्हें संकलित कर सकें।

अंत में, पीठ ने मामले को 17 दिसंबर 2025 के लिए सूचीबद्ध किया, यह संकेत देते हुए कि तब तक ठोस प्रगति की उम्मीद है।

Case Title: Federation of Lepy. Organ. (FOLO) & Anr. vs. Union of India & Ors.

Case No.: W.P.(C) No. 83/2010

Connected Case: W.P.(C) No. 1151/2017

Case Type: Public Interest Litigation (PIL – Writ Petition Civil)

Decision / Order Date: 12 November 2025

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