गौहाटी हाई कोर्ट ने 18 नवंबर 2025 को एक विस्तृत फैसला सुनाया, जिसमें जॉरहाट इंजीनियरिंग कॉलेज से 2022 में सेवानिवृत्त हुए वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. सत्यजीत पॉल द्वारा दायर तीन संबंधित रिट अपीलों का निपटारा किया गया। अदालत कक्ष का माहौल शांत लेकिन अपेक्षाओं से भरा हुआ था, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की पीठ ने इस मामले को उठाया, जिस पर असम के कई शिक्षकों की नजरें लगी हुई थीं।
Background (पृष्ठभूमि)
डॉ. पॉल की कानूनी लड़ाई कुछ असामान्य समयरेखा से शुरू हुई। हालांकि उन्हें 31 मार्च 2022 को एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) ने उनकी प्रोफेसर (स्टेज-5) के पद पर पदोन्नति की सिफारिश 17 मई 2018 से प्रभावी रूप में कर दी - ठीक उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले। औपचारिक पदोन्नति आदेश 5 अप्रैल 2022 को जारी हुआ, जब वह चार दिन पहले ही सेवा छोड़ चुके थे।
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यह मोड़ इसलिए आया क्योंकि यह पदोन्नति 28 मार्च 2022 के एक कार्यालय ज्ञापन (OM) पर आधारित थी, जिसमें एआईसीटीई (AICTE) द्वारा करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समयसीमा बढ़ाने को अपनाया गया था। बाद में, राज्य सरकार ने इस OM को वित्त विभाग की स्वीकृति न होने के कारण वापस ले लिया और 19 मई 2023 को नया OM जारी किया, जिसने डॉ. पॉल की पदोन्नति को प्रभावहीन बना दिया।
प्रोफेसरों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, परंतु यह लाभ न मिलने पर डॉ. पॉल ने अपनी सेवा-विमुक्ति और 2022 के OM की वापसी को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया।
Court’s Observations (अदालत की टिप्पणियाँ)
सुनवाई के दौरान पीठ बार-बार एक केंद्रीय प्रश्न पर लौटी: क्या सेवानिवृत्ति के बाद दी गई तथा त्रुटिपूर्ण कार्यकारी आदेश पर आधारित पदोन्नति से व्यक्ति की सेवा अवधि कानूनी रूप से बढ़ सकती है?
अदालत ने नोट किया कि यद्यपि DPC ने डॉ. पॉल की पदोन्नति की सिफारिश समय रहते की थी, लेकिन उस सिफारिश की नींव - 28 मार्च 2022 का OM - वित्तीय स्वीकृति के बिना था और इसलिए दोषपूर्ण था। मुख्य न्यायाधीश ने एक मौके पर कहा, “सिफारिश मूलतः उस अधिकार पर आधारित थी जो उस ज्ञापन के वापस लेते ही समाप्त हो गया।”
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पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के Government of West Bengal vs. Dr. Amal Satpathi फैसले पर भी भरोसा किया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि पदोन्नति तभी प्रभावी होती है जब कर्मचारी पदोन्नत पद का कार्यभार संभालता है। डॉ. पॉल, हालांकि, सेवानिवृत्ति से पहले कभी प्रोफेसर के रूप में कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाए।
फिर भी अदालत ने उनकी स्थिति की विशेषता को स्वीकार किया। उन्होंने सभी योग्यता मानदंड पूरे कर लिए थे, उनकी पात्रता पर कोई सवाल नहीं था, और उनकी पदोन्नति CAS के तहत थी, जिसमें रिक्त पद की आवश्यकता नहीं होती। पीठ ने टिप्पणी की, “नियमित पदोन्नति और CAS उन्नयन के बीच एक स्पष्ट अंतर है,” सेवा विस्तार और प्रतिपोषित वित्तीय मान्यता के बीच संतुलन बनाते हुए।
Decision (निर्णय)
हाई कोर्ट ने एकल-न्यायाधीश के आदेश में संशोधन करते हुए डॉ. पॉल को केवल वेतन व भत्तों के वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया - 17 मई 2018 से 31 मार्च 2022 तक, यानी उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि तक।
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हालांकि, अदालत ने सेवा अवधि को 2027 तक बढ़ाने की उनकी मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया और कहा कि “सेवानिवृत्ति के बाद पदोन्नति सिफारिश को प्रभावी नहीं किया जा सकता।” अदालत ने यह भी तय किया कि उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त माना जाएगा और उनकी पेंशन भी उसी वेतनमान पर निर्धारित की जाएगी।
इस स्पष्टीकरण के साथ अपीलें आंशिक रूप से स्वीकार की गईं और वर्षों से लंबित यह विवाद आखिरकार समाप्त हो गया - कम से कम सेवा लाभों के संदर्भ में।
Case Title: Dr. Satyajit Paul vs. State of Assam & Others
Case Numbers:
- Writ Appeal No. 191 of 2025
- Writ Appeal No. 184 of 2025
- Writ Appeal No. 193 of 2025
Case Type: Writ Appeals (Service Matter – CAS Promotion & Retirement Dispute)
Decision Date: 18 November 2025










