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जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने कुशल कर्मी वेतन मांग याचिका खारिज की, कहा-सिर्फ कंप्यूटर ज्ञान से ऑर्डरली नियुक्ति नहीं बदलती

Vivek G.

उमर मुख्तार मीर बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और अन्य, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने कंप्यूटर जानने वाले ऑर्डरली की कुशल श्रमिक वेतन याचिका खारिज की। संविदाकर्मी वेतन अधिकारों पर अहम टिप्पणी।

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने कुशल कर्मी वेतन मांग याचिका खारिज की, कहा-सिर्फ कंप्यूटर ज्ञान से ऑर्डरली नियुक्ति नहीं बदलती

जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख हाई कोर्ट के श्रीनगर विंग ने गुरुवार को एक ज़रूरत-आधारित कर्मचारी द्वारा दायर उस रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कुशल श्रमिक दरों पर वेतन देने की मांग की गई थी। जस्टिस संजय धर की एकल-न्यायाधीश पीठ ने भीड़भरे कोर्टरूम में फैसला सुनाया, सुनवाई के दौरान वकीलों से संक्षिप्त बातचीत के बाद आदेश के अहम हिस्से पढ़े। यह मामला सरकारी विभागों में खास चर्चा में था, क्योंकि कई संविदाकर्मी नियुक्ति पत्र से ज़्यादा जिम्मेदारियाँ निभाते हैं।

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Background

याचिकाकर्ता, उमर मुख्तार मीर, को 2013 में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के CAMPA यूनिट में ऑर्डरली के रूप में लगाया गया था। समय के साथ उनका कहना है कि वे कंप्यूटर ऑपरेटर की तरह काम करने लगे और इसलिए उन्हें 2022 की सरकारी वेतन अधिसूचना के तहत कुशल श्रमिकों वाली न्यूनतम मजदूरी मिलनी चाहिए। उनकी एक पुरानी याचिका के बाद विभाग को प्रतिनिधित्व पर पुनर्विचार का निर्देश मिला था, पर अंततः दावा खारिज कर दिया गया।

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मीर का तर्क था कि वे अन्य मंत्रालयिक स्टाफ की तरह काम कर रहे हैं, फिर भी उन्हें अकुशल श्रमिकों वाली मजदूरी मिल रही है। उनके वकील ने कहा कि राज्य समान कार्य करने वालों के साथ भेदभाव नहीं कर सकता, खासकर जब अन्य कंप्यूटर ऑपरेटर्स को ज्यादा वेतन दिया जा रहा है।

वहीं केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने कहा कि मीर ने स्वेच्छा से ऑर्डरली पद के लिए आवेदन किया था, न कि कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए, इसलिए कुशल पदों की मजदूरी मांगने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

Court’s Observations

जस्टिस धर ने 2013 के नियुक्ति आदेश की बारीकी से जांच की और पाया कि उसमें स्पष्ट रूप से मीर की नियुक्ति ऑर्डरली के रूप में दर्ज है-चाहे वे कंप्यूटर जानते हों या बाद में विभाग ने उनसे ऐसा काम लिया हो। अदालत ने यह भी नोट किया कि उसी चयन सूची में कुछ उम्मीदवार कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में औपचारिक रूप से चुने गए थे, मीर नहीं।

“पीठ ने टिप्पणी की, ‘सिर्फ कंप्यूटर जानने से किसी कर्मचारी को कुशल श्रेणी की मजदूरी का हक नहीं मिल जाता।’”

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अदालत ने यह भी साफ किया कि वेतन का अधिकार पद से आता है, न कि अतिरिक्त कौशल या वैकल्पिक कार्य से-भले ही वह विभागीय सुविधा के लिए किया गया हो। जस्टिस धर ने कहा, “कोई कर्मचारी सिर्फ इसलिए ऊँचे पद का वेतन नहीं मांग सकता क्योंकि वह उस पद के लिए योग्य है,” अन्यथा संविदात्मक भर्ती प्रक्रियाएं ही अर्थहीन हो जाएंगी।

कोर्ट ने यह भी माना कि पिछले निर्देश के बाद विभाग द्वारा दावा खारिज करना न तो गैरकानूनी था और न ही मनमाना।

Decision

अंत में अदालत ने याचिका को “निर्मूल” बताते हुए खारिज कर दिया और सभी अंतरिम आदेश तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिए, जिससे मीर की कुशल श्रमिक वेतन वाली मांग वहीं समाप्त हो गई।

Case Title: Umer Mukhtar Mir vs. UT of Jammu & Kashmir & Another

Case No.: WP(C) No. 2176/2023

Case Type: Writ Petition (Civil)

Decision Date: 14 November 2025

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