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सुप्रीम कोर्ट ने WBSSC मामले में ‘दागी उम्मीदवारों’ की कड़ी जांच का निर्देश दिया, कहा-ताज़ा चयन "पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित" होना चाहिए

Vivek G.

सुप्रीम कोर्ट ने WBSSC भर्ती विवाद को फिर कलकत्ता हाई कोर्ट भेजा, दागी उम्मीदवारों की कड़ी जांच और पूरी पारदर्शिता के साथ ताज़ा चयन का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने WBSSC मामले में ‘दागी उम्मीदवारों’ की कड़ी जांच का निर्देश दिया, कहा-ताज़ा चयन "पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित" होना चाहिए

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) से जुड़े मामलों में एक स्पष्ट संदेश दिया-अब सभी नई शिकायतों की पहली सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट करेगी। कोर्ट में हुई संक्षिप्त लेकिन तीखी बहस के दौरान यह साफ दिखा कि दिल्ली अब शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े पुराने विवादों को माइक्रो-मैनेज नहीं करेगी। कोर्ट नंबर 11 का माहौल तुरंत बदल गया जब जस्टिस संजय कुमार ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट पहले ही “मसले पर विस्तार से काम कर रहा है”, जिससे साफ संकेत मिला कि मामला अब अपने मूल मंच पर लौट रहा है।

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पृष्ठभूमि

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी की अगुवाई में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। उनकी चुनौती मुख्य रूप से 14 जुलाई 2025 को कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा WPA 14723/2025 में दिए गए आदेश को लेकर थी। याचिकाकर्ताओं की चिंता यह भी थी कि क्या राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले State of West Bengal vs Baishakhi Bhattacharyya (Chatterjee) में दिए गए सभी निर्देशों का सही पालन किया है, जिसमें ‘दागी उम्मीदवारों’ की सूची साफ करने के कड़े आदेश शामिल थे।

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लेकिन बेंच ने एक महत्वपूर्ण तथ्य पर ध्यान दिलाया-कलकत्ता हाई कोर्ट में एक नई रिट, WPA 26288/2025, पहले से ही सक्रिय रूप से सुनी जा रही है। उस रिट में नवंबर महीने की चार अलग-अलग तारीखों पर जज ने कई मुद्दों को चिन्हित भी किया है। इससे मामला दोबारा कोलकाता केंद्रित हो गया।

कोर्ट के अवलोकन

बेंच ने टिप्पणी की, “चूंकि हाई कोर्ट की एक सम्मानित जज पहले ही इस मुद्दे को देख रही हैं, अतः यह उचित है कि प्रथम मंच के रूप में हाई कोर्ट ही यह प्रक्रिया पूरी करे।”

जजों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका केवल यह देखने तक सीमित थी कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन हुआ या नहीं। अब जब हाई कोर्ट ही उसी बिंदु की जांच कर रहा है, तो दिल्ली में समानांतर जांच चलाना उचित नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी पर कोर्ट रूम में हलचल भी दिखी। बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट यह सुनिश्चित करे कि “कोई भी दागी उम्मीदवार किसी भी बहाने से नये चयन में प्रवेश न कर सके।”

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कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दागी उम्मीदवारों की पूरी सूची सार्वजनिक डोमेन में डाली जाए, ताकि आम लोग और प्रभावित अभ्यर्थी स्वयं उसकी जांच कर सकें।

साथ ही, बेंच ने यह स्पष्ट किया कि जो ‘स्वच्छ’ (untainted) उम्मीदवार पहले की प्रक्रिया में सफल हुए थे, उनकी उम्मीदवारी को नए नियमों-यानी 2025 के असिस्टेंट टीचर चयन नियमों-के लागू होने के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए। कोर्ट कक्ष में मौजूद कई युवा उम्मीदवार इस टिप्पणी से कुछ राहत महसूस करते दिखे।

निर्णय

इन सभी दिशा-निर्देशों के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा कर दिया और याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी कि वे अपनी वैध शिकायतें हाई कोर्ट में रखें। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट को यह पूरा मामला स्वतंत्र रूप से देखना होगा और सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों में की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित नहीं होना होगा।

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सभी लंबित आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया। सुनवाई इसी बिंदु पर समाप्त हुई कि अब वास्तविक जांच और कार्रवाई हाई कोर्ट के स्तर पर ही आगे बढ़ेगी।

Case Title: Bejoy Biswas & Others vs. The State of West Bengal & Others

Case No.: SLP (C) No. 23784/2025

Case Type: Special Leave Petition (Civil)

Decision Date: 26 November 2025

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