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मध्यप्रदेश मामले में पुलिस आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, वरिष्ठ अधिकारियों से हलफनामा तलब, हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई तेज

Vivek G.

अनवर हुसैन बनाम मध्य प्रदेश राज्य, मध्यप्रदेश पुलिस आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, वरिष्ठ अधिकारियों से हलफनामा तलब। अनवर हुसैन मामले की सुनवाई 9 दिसंबर को फिर होगी।

मध्यप्रदेश मामले में पुलिस आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, वरिष्ठ अधिकारियों से हलफनामा तलब, हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई तेज

मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े गंभीर आरोपों पर कड़ी नजर डाली। अनवर हुसैन की याचिका पर शुरू हुई सुनवाई तब मोड़ ले गई जब एक हस्तक्षेप आवेदन में नए तथ्य सामने आए। बेंच ने साफ कहा कि ये मुद्दे “जनता के विश्वास से सीधे जुड़े हैं,” और इसी आधार पर कई पुलिस अधिकारियों को तलब करते हुए उन्हें मामले का पक्षकार बना दिया।

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Background (पृष्ठभूमि)

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में तब पहुंचा जब मार्च में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित किया था। मूल याचिका अनवर हुसैन के आपराधिक मामले से जुड़ी थी, लेकिन एक आवेदक द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका ने सुनवाई की दिशा बदल दी-यह दावा करते हुए कि पुलिस अधिकारियों से संबंधित कुछ घटनाएं सीधे तौर पर इस मामले से जुड़ी हैं और अदालत को इन पर ध्यान देना चाहिए।

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न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि नए तथ्य इतने महत्वपूर्ण हैं कि उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के बाहर एक वकील ने कहा, “ये मामूली प्रक्रियागत भूलें नहीं हैं; यह इस बात से जुड़ा है कि अधिकारों का प्रयोग कैसे हो रहा है।”

Court’s Observations (अदालत की टिप्पणियाँ)

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी पक्षों को सुना, जिनमें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े भी शामिल थे, जिन्होंने हस्तक्षेप का समर्थन किया।

आवेदन और उससे जुड़े दस्तावेजों को देखने के बाद बेंच ने कहा कि प्रस्तुत सामग्री काफी महत्वपूर्ण प्रतीत होती है। “बेंच ने कहा, ‘उठाए गए मुद्दे पुलिस के आचरण से जुड़े बुनियादी और मूल प्रश्न हैं, जो उनके पद के अधिकार के तहत किए गए कार्यों से संबंधित हैं। ऐसे मामलों का सीधा प्रभाव जनता के विश्वास पर पड़ता है।’”

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अदालत ने यह भी नोट किया कि ए.डी.सी.पी. की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया है कि उन्हें इन आरोपों की जानकारी सिर्फ एक दिन पहले ही मिली। यह देरी और पुलिस विभाग के आंतरिक संचार पर भी न्यायालय ने चिंता व्यक्त की।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, बेंच ने ए.डी.सी.पी. और संबंधित थाना प्रभारी (एस.एच.ओ.) को मामले में प्रतिवादी बनाया। इसके बाद अदालत ने इंदौर के पुलिस आयुक्त को भी प्रतिवादी के रूप में शामिल कर लिया।

Court’s Decision (अदालत का निर्णय)

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप आवेदन को मंजूरी देते हुए आवेदक को प्रतिवादी क्रमांक 2 बनाया। दो पुलिस अधिकारियों को प्रतिवादी क्रमांक 3 और 4 तथा इंदौर पुलिस आयुक्त को प्रतिवादी क्रमांक 5 के रूप में शामिल किया गया।

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अदालत ने सभी नए प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे हस्तक्षेप आवेदन में लगाए गए हर आरोप और पुलिस आचरण से जुड़े व्यापक मुद्दों पर अपना-अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें। मामला अब 9 दिसंबर 2025 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

आदेश यहीं समाप्त होता है, और अब सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामों का इंतजार करेगी।

Case Title: Anwar Hussain vs. State of Madhya Pradesh

Case Number: SLP (Crl.) No. 14087/2025

Case Type: Special Leave Petition (Criminal) – seeking admission

Decision / Order Date: 25 November 2025

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