शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया जिसमें आगरा निवासी शुभम को जमानत देने से इनकार किया गया था। शुभम लगभग तीन वर्षों से जेल में बंद था। पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि अपील के न片टने में हो रही देरी “चिंता का विषय” है। अंततः कोर्ट ने उसकी सज़ा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया।
पृष्ठभूमि
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर 1, आगरा ने शुभम को पांच साल की कठोर कैद और ₹5,000 के जुर्माने की सजा दी थी। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे छह महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी थी।
उसने इस फैसले को चुनौती देते हुए क्रिमिनल अपील नंबर 7160/2023 इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की, लेकिन अपील लंबित ही रही। जब हाईकोर्ट ने 20 अगस्त 2025 को उसकी सज़ा निलंबित करने की मांग खारिज कर दी, तो शुभम ने विशेष अनुमति याचिका के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
21 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने इस बात पर ध्यान दिया कि शुभम लगभग तीन वर्ष जेल में बिता चुका है और हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई जल्द होने की कोई संभावना नहीं दिख रही।
कोर्ट के अवलोकन
कोर्ट नंबर 3 में सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को काफी संक्षेप में निपटाया। याची की ओर से कहा गया कि शुभम अपनी कुल सजा का आधे से अधिक हिस्सा पहले ही काट चुका है, जबकि उसकी अपील अभी तक अंतिम सुनवाई के चरण तक नहीं पहुंची। राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया, लेकिन जेल में बिताए गए समय के तथ्यों पर कोई विवाद नहीं हुआ।
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न्यायाधीश देरी को लेकर चिंतित दिखे। चर्चा के दौरान एक बिंदु पर उन्होंने अनौपचारिक रूप से कहा कि जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सवाल हो, तो इतनी लंबी लंबितता को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
आदेश में भी पीठ ने लिखा: “मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, विशेष रूप से अपीलकर्ता द्वारा बिताई गई कैद की अवधि… और यह देखते हुए कि निकट भविष्य में अपील की सुनवाई की संभावना नहीं है, हम याचना स्वीकार करने के इच्छुक हैं।”
यह पंक्ति स्पष्ट रूप से उस व्यावहारिक संकट की ओर इशारा करती है-हाईकोर्ट में लंबित आपराधिक अपीलों की भीड़, जिस कारण दोषसिद्ध व्यक्तियों को लंबे समय तक सुनवाई का इंतजार करना पड़ता है।
निर्णय
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने शुभम की सजा निलंबित कर दी और निर्देश दिया कि हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने तक उसे जमानत पर रिहा किया जाए। पीठ ने कहा कि जमानत की शर्तें ट्रायल कोर्ट तय करेगा।
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आदेश में लिखा है: “हम सजा को निलंबित करते हैं और निर्देश देते हैं कि अपील की लंबित अवधि में अपीलकर्ता को उन शर्तों पर जमानत दी जाए जो ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित की जाएंगी।”
इसके साथ ही अपील स्वीकार कर ली गई और सभी लंबित आवेदन निष्पादित माने गए। आदेश सुनकर रक्षा पक्ष में राहत दिखी, जबकि राज्य के वकील ने बिना किसी अतिरिक्त आपत्ति के निर्णय को स्वीकार कर लिया। अब मामला हाईकोर्ट में वापस चला जाएगा, जहां अपील अपने अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करेगी-जो कब होगी, यह अभी भी अनिश्चित है।
Case Title: Shubham vs. State of Uttar Pradesh
Case No.: Criminal Appeal (Arising out of SLP (Crl.) No. 16235 of 2025)
Case Type: Criminal Appeal – Suspension of Sentence / Bail during Pendency of Appeal
Decision Date: 21 November 2025









