संविदा की रोक (Injunction) Format India — Free Templates & Samples
संविदा की रोक (Injunction) भारतीय कानून में एक विशेष न्यायिक आदेश है जो किसी व्यक्ति को किसी विशिष्ट कार्य को करने या करने से रोकने का निर्देश देता है। विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 के तहत शासित यह उपचार संपत्ति विवाद, अतिक्रमण और अनुबंध भंग में महत्वपूर्ण है। अस्थायी और स्थायी निषेधाज्ञा के मुफ्त टेम्पलेट और सैंपल यहाँ डाउनलोड करें।
What is संविदा की रोक (Injunction)?
संविदा की रोक (Injunction) एक न्यायिक प्रतिबंध है जिसके द्वारा न्यायालय किसी पक्षकार को किसी निश्चित कार्य को करने से रोकता है (निषेधात्मक निषेधाज्ञा) या कोई कार्य करने का आदेश देता है (अनिवार्य निषेधाज्ञा)। भारत में, यह विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 36 से 42 के तहत और सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 39 के अंतर्गत शासित है।
धारा 38 के तहत स्थायी निषेधाज्ञा (Perpetual Injunction) तब दी जाती है जब वादी के अधिकार का उल्लंघन हो रहा हो या होने का आसन्न भय हो, मौद्रिक मुआवजा पर्याप्त न हो, और रक्षा का अन्य कोई उपाय न हो। यह मुख्य रूप से अचल संपत्ति विवादों (अतिक्रमण, अवैध निर्माण) और बौद्धिक संपदा (IP) उल्लंघन में प्रयोग होती है।
CPC के आदेश 39 नियम 1 और 2 के तहत अंतरिम निषेधाज्ञा (Temporary Injunction) मुकदमे के दौरान संपत्ति या स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए जारी की जाती है। यह आदेश वादी को अपूरणीय क्षति (Irreparable Injury) से बचाता है। कोई भी व्यक्ति जिसके वैध अधिकार का हनन हो रहा हो, निषेधाज्ञा का आवेदन कर सकता है। भारतीय कानून में संविदा की रोक (Injunction) क्या है, इसे समझना संपत्ति और अधिकारों की तत्काल सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
When This Format Required?
अचल संपत्ति विवाद: जब पड़ोसी आपकी भूमि पर अवैध कब्जा कर रहा हो या बिना अनुमति के निर्माण कर रहा हो।
अनुबंध भंग: जब कोई कर्मचारी या व्यापारी गैर-प्रतिस्पर्धा (Non-compete) अनुबंध तोड़कर आपके व्यापार को नुकसान पहुँचा रहा हो।
बौद्धिक संपदा उल्लंघन: जब कोई आपके ट्रेडमार्क, कॉपीराइट या पेटेंट का अवैध उपयोग करके नकली उत्पाद बेच रहा हो।
संपत्ति का अवैध हस्तांतरण: जब मुकदमा चल रहा हो और प्रत्यर्थी संपत्ति को तीसरे व्यक्ति के नाम बेचने या गिरवी रखने का प्रयास कर रहा हो।
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Quick Overview
Step-by-Step Guide
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चरण 1: उल्लंघन और अपूरणीय क्षति का प्रमाण तैयार करें
यह साबित करें कि आपके वैध अधिकार का उल्लंघन हो रहा है (जैसे—पड़ोसी ने आपकी दीवार गिरा दी) और यह क्षति अपूरणीय (Irreparable) है, जिसे बाद में पैसों से पूरा नहीं किया जा सकता।
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चरण 2: मुख्य वाद पत्र (Plaint) और अंतरिम आवेदन ड्राफ्ट करें
सिविल न्यायालय में मुख्य वाद (जैसे—स्थायी निषेधाज्ञा और संपत्ति की वापसी) दाखिल करें। इसके साथ ही CPC आदेश 39 के तहत अंतरिम निषेधाज्ञा (Stay Order) का आवेदन संलग्न करें।
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चरण 3: पक्षकारों और संपत्ति का विवरण दर्ज करें
वादी और प्रत्यर्थी का विवरण स्पष्ट लिखें। विवादित संपत्ति या अधिकार का सटीक विवरण (सर्वे नंबर, खतौनी, या अनुबंध की शर्तें) दें ताकि अदालत स्पष्ट आदेश पारित कर सके।
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चरण 4: प्राथमिकता का आधार (Prima Facie Case) लिखें
अदालत को यह समझाएं कि आपका मामला दस्तावेजों की पहली नजर में ही मजबूत है। स्वामित्व के दस्तावेज, रजिस्ट्री या पुराने रिकॉर्ड का हवाला देकर अपनी बात स्थापित करें।
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चरण 5: संतुलन की सुविधा और शपथपत्र लगाएं
यह दर्शाएं कि निषेधाज्ञा देने से आपको जो लाभ होगा, वह प्रत्यर्थी को मिलने वाली हानि से कहीं अधिक है (Balance of Convenience)। सभी तथ्यों की पुष्टि के लिए एक विस्तृत शपथपत्र संलग्न करें।
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चरण 6: न्यायालय शुल्क भरें और अत्यंत तात्कालिक (Urgent) सुनवाई मांगें
निर्धारित न्यायालय शुल्क का भुगतान करें। यदि तुरंत निर्माण या हानि हो रही हो, तो न्यायालय से नोटिस के बिना (Ex-parte) अंतरिम राहत की प्रार्थना करें।
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