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संविदा भंग (Breach of Contract) Format India — Free Samples

संविदा भंग (Breach of Contract) तब होता है जब कोई पक्ष अनुबंध की शर्तों को पूरा करने से इनकार कर देता है। भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के तहत इससे पीड़ित पक्ष को मुआवजा (Damages) या विशिष्ट निष्पादन का अधिकार होता है। वकील नोटिस, शिकायत और मुआवजे की याचिका जैसे फॉर्मेट सही कानूनी कार्रवाई के लिए जरूरी हैं। भारत में संविदा भंग के मुफ्त टेम्पलेट और सैंपल यहाँ डाउनलोड करें।

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Courts

What is संविदा भंग (Breach of Contract)?

संविदा भंग (Breach of Contract) वह स्थिति है जिसमें एक पक्ष अनुबंध (Contract) में निहित अपने कानूनी दायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है या उसे पूरा करने से इनकार कर देता है। भारत में, यह भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 37 और 73 के तहत शासित है। धारा 37 के अनुसार, पक्षों को अनुबंध की शर्तों का पालन करना बाध्यकारी है।

संविदा भंग मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: वास्तविक भंग (Actual Breach), जब निर्धारित समय पर अनुबंध तोड़ा जाए, और पूर्वकालिक भंग (Anticipatory Breach - धारा 39), जब पक्ष समय से पहले ही अनुबंध पूरा न करने का इरादा व्यक्त करे।

कानूनी रूप से, संविदा भंग होने पर पीड़ित पक्ष धारा 73 के तहत मुआवजा (Damages) पाने का हकदार होता है। मुआवजे की राशि वह नुकसान है जो अनुबंध भंग का स्वाभाविक और संभावित परिणाम हो। धारा 74 तय करती है कि यदि अनुबंध में पूर्व-निर्धारित हर्जाना (Liquidated Damages) लिखा है, तो वास्तविक नुकसान से अधिक राशि नहीं मांगी जा सकती। कोई भी वयस्क और सुस्थ व्यक्ति जिसका अनुबंधित अधिकार छीना गया हो, वाद दाखिल कर सकता है। भारतीय कानून में संविदा भंग क्या है, इसे समझना अपने व्यावसायिक और वित्तीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।

When This Format Required?

व्यापारिक आपूर्ति विफलता: जब विक्रेता ने अनुबंध के अनुसार सामान समय पर या निर्धारित गुणवत्ता में आपूर्ति न किया हो।

संपत्ति सौदे में मुकरना: जब विक्रेता ने बिक्री अनुबंध (Agreement to Sell) पर हस्ताक्षर करने के बाद संपत्ति खाली कराने या रजिस्ट्री कराने से इनकार कर दिया हो।

सेवा या रोजगार विवाद: जब कर्मचारी ने बिना नोटिस दिए नौकरी छोड़ दी हो या नियोक्ता ने वादा किए अनुसार वेतन न दिया हो।

भुगतान डिफॉल्ट: जब पक्ष ने सेवाएं या सामान प्राप्त करने के बाद निर्धारित समय पर भुगतान करने से इनकार कर दिया हो।

Quick Overview

संविदा भंग भारत में भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 द्वारा शासित है। इन दस्तावेजों को निर्धारित न्यायालय शुल्क पर सिविल न्यायालय में दाखिल किया जाता है; नोटिस के लिए स्टाम्प पेपर आवश्यक है। यह व्यापारिक विवाद, सेवा अनुबंध और आपूर्ति विफलता के लिए उपयोग होता है। यह आमतौर पर 3-10 पेज लंबा होता है।

Step-by-Step Guide

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    चरण 1: अनुबंध और भंग के सबूत इकट्ठा करें

    मूल अनुबंध, ईमेल, बिल, भुगतान रसीदें और वह सबूत जमा करें जो यह साबित करे कि प्रत्यर्थी ने अनुबंध की किन शर्तों का उल्लंघन किया है।

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    चरण 2: वकील नोटिस (Legal Notice) भेजें

    अदालत जाने से पहले प्रत्यर्थी को एक विधिक नोटिस भेजें। नोटिस में अनुबंध का विवरण, भंग का तरीका और 15-30 दिन के भीतर दायित्व पूरा करने या मुआवजा देने की चेतावनी दें।

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    चरण 3: वाद पत्र (Plaint) ड्राफ्ट करें

    न्यायालय में दाखिल किए जाने वाले वाद पत्र में पक्षकारों का नाम, अनुबंध का विवरण, भंग की तिथि और आपके अधिकारों का उल्लंघन कैसे हुआ, यह स्पष्ट रूप से लिखें।

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    चरण 4: मुआवजे (Damages) की गणना करें

    धारा 73 के तहत आपको हुए वास्तविक नुकसान और लाभ की हानि का विस्तृत गणित (Calculation) प्रस्तुत करें। यदि अनुबंध में धारा 74 के तहत लिक्विडेटेड डैमेजेस है, तो उसका उल्लेख करें।

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    चरण 5: प्रार्थना (Prayer) और न्यायालय शुल्क

    अदालत से मुआवजा, मुकदमा खर्च और यदि आवश्यक हो तो विशिष्ट निष्पादन (Specific Performance) की प्रार्थना करें। दावे की राशि के अनुसार निर्धारित न्यायालय शुल्क (Court Fee) भरें।

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    चरण 6: शपथपत्र और दस्तावेज संलग्न करें

    वाद पत्र के साथ अपना शपथपत्र (Affidavit) लगाएं। मूल अनुबंध, पत्राचार और वकील नोटिस की प्रतियां साक्ष्य के रूप में सिविल जज की अदालत में दाखिल करें।

Disclaimer: This template is provided for general informational and drafting reference purposes only. It does not constitute legal advice. Stamp duty, registration, and procedural requirements may vary by state. Consult a qualified advocate before executing or filing any legal document. For more details, see our Disclaimer.