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कंपनीज एक्ट (Companies Act) Format India — Hindi Templates

कंपनीज एक्ट (Companies Act) दस्तावेज भारत में किसी भी पंजीकृत कंपनी के प्रशासन, निर्णय लेने और कानूनी अनुपालन को नियंत्रित करते हैं। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत शासित इन दस्तावेजों में बोर्ड प्रस्ताव, निदेशक नियुक्ति और शेयर आवंटन शामिल हैं। सही ड्राफ्टिंग कंपनी को दंड और विवादों से बचाती है। भारत में कंपनीज एक्ट कानूनी फॉर्मेट के मुफ्त टेम्पलेट और सैंपल यहाँ डाउनलोड करें।

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What is कंपनीज एक्ट (Companies Act)?

कंपनीज एक्ट (Companies Act) दस्तावेजीकरण वह कानूनी रिकॉर्ड है जो किसी कंपनी के निगमन (Incorporation) के बाद उसके प्रशासन, निर्णय लेने और व्यावसायिक लेनदेन को दर्ज करता है। यह संस्थापक दस्तावेजों (MOA/AOA) से अलग है। भारत में, यह कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा शासित है, जिसने 1956 के पुराने अधिनियम की जगह ली, और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) तथा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) द्वारा प्रशासित है।

ये दस्तावेज बोर्ड और शेयरहोल्डर्स द्वारा कॉर्पोरेट शक्तियों के वैध उपयोग का प्रमाण हैं। प्रमुख दस्तावेजों में धारा 114, 117 और 179 के तहत बोर्ड व शेयरहोल्डर प्रस्ताव, धारा 152, 161 और 168 के तहत निदेशकों की नियुक्ति व इस्तीफा, और धारा 139 व 203 के तहत ऑडिटर व कंपनी सचिव की नियुक्ति शामिल है।

लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों में अलगाव समझौते (धारा 230-232), संयुक्त उद्यम अनुबंध, शेयर अंडरराइटिंग और कंपनी के प्रकार बदलने (धारा 18) के प्रस्ताव शामिल हैं। कंपनी का समापन अब दिवालियापन और देनदारी अधिनियम, 2016 (IBC) और कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत होता है। ये सभी दस्तावेज भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत साक्ष्य के रूप में मान्य हैं। भारतीय कानून में कंपनीज एक्ट क्या है, यह समझना कॉर्पोरेट अनुपालन के लिए अनिवार्य है।

When is कंपनीज एक्ट (Companies Act) Required?

बोर्ड और शेयरहोल्डर निर्णय: पूंजी, लाभांश, उधार, निवेश और प्रबंधकीय पारिश्रमिक के लिए धारा 114 और 179 के तहत प्रस्ताव पास करना।

निदेशक और अधिकारी परिवर्तन: धारा 139, 152, 161 और 203 के तहत निदेशक, प्रबंध निदेशक, ऑडिटर और कंपनी सचिव की नियुक्ति या हटाना, और DIR-12 फाइलिंग।

संवैधानिक परिवर्तन: धारा 13, 14 और 18 के तहत MOA/AOA में संशोधन, नाम बदलना या कंपनी का प्रकार बदलना (प्राइवेट से पब्लिक)।

कॉर्पोरेट लेनदेन: अलगाव (Amalgamation), संयुक्त उद्यम, शेयर अंडरराइटिंग और पूंजी जुटाने के लिए अनुबंध।

बंद और समापन: कंपनी अधिनियम, 2013 और दिवालियापन एवं देनदारी अधिनियम (IBC), 2016 के तहत स्वैच्छिक समापन या लिक्विडेशन।

Quick Overview

कंपनीज एक्ट दस्तावेज भारत में कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा शासित हैं और मंत्रालय (MCA) के माध्यम से प्रशासित होते हैं। इन्हें निर्धारित न्यायालय शुल्क/एमसीए शुल्क पर दाखिल किया जाता है; स्टाम्प पेपर आवश्यक नहीं। यह निदेशक नियुक्ति, प्रस्ताव और शेयर जारी करने के लिए उपयोग होते हैं। यह 1-15 पेज लंबा होता है।

How To Draft कंपनीज एक्ट (Companies Act) Documents — Step by Step Guide

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    चरण 1: कॉर्पोरेट कार्रवाई और प्रावधान की पहचान करें

    कार्रवाई निर्धारित करें—निदेशक नियुक्ति (धारा 152/161), पूंजी वृद्धि (धारा 61), MOA/AOA संशोधन (धारा 13/14), या समापन (IBC 2016)—और उसे नियंत्रित करने वाली धारा की पहचान करें।

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    चरण 2: उचित बैठक बुलाएं

    तय करें कि मामले के लिए बोर्ड मीटिंग (धारा 173) आवश्यक है या साधारण बैठक (AGM/EGM - धारा 96 व 100)। धारा 101 के तहत उचित नोटिस और धारा 102 के तहत व्याख्यात्मक विवरण (Explanatory Statement) जारी करें।

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    चरण 3: प्रस्ताव (Resolution) ड्राफ्ट करें

    आवश्यकतानुसार साधारण या विशेष प्रस्ताव तैयार करें। दैनिक मामलों के लिए साधारण प्रस्ताव (धारा 114(1)) और MOA/AOA संशोधन या प्रकार बदलने के लिए विशेष प्रस्ताव (धारा 114(2)) पास करें।

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    चरण 4: प्रस्ताव पास करें और रिकॉर्ड करें

    बैठक में प्रस्ताव पास करें और धारा 118 के तहत 30 दिनों के भीतर मिनट्स बुक में दर्ज करें। उपस्थिति, कोरम और मतदान परिणामों को स्पष्ट रूप से दर्ज करें।

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    चरण 5: रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) में दाखिल करें

    निर्धारित समय में प्रासंगिक MCA ई-फॉर्म दाखिल करें—विशेष प्रस्ताव के लिए MGT-14 (धारा 117), निदेशक परिवर्तन के लिए DIR-12, पूंजी के लिए SH-7—पास होने के 30 दिनों के भीतर।

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    चरण 6: अनुबंध निष्पादित करें और रिकॉर्ड रखें

    लेनदेन (संयुक्त उद्यम, अलगाव) के लिए उचित स्टाम्प पेपर पर अनुबंध निष्पादित करें, बोर्ड/शेयरहोल्डर की मंजूरी लें, और कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 85, 88 और 189 के तहर संबंधित रजिस्टरों को अपडेट रखें।