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माध्यस्थम अधिनियम (Arbitration Act) Format India — Free Samples

माध्यस्थम अधिनियम (Arbitration Act) भारत में अदालत के बाहर विवादों के तेज और गोपनीय समाधान के लिए बनाया गया कानून है। संलग्नकीकरण एवं माध्यस्थम अधिनियम, 1996 के तहत व्यापारिक और संविदा विवादों का निपटान माध्यस्थ (Arbitrator) द्वारा किया जाता है। माध्यस्थम खंड, धारा 11 आवेदन और चुनौती याचिका जैसे फॉर्मेट सही ड्राफ्टिंग के लिए जरूरी हैं। भारत में माध्यस्थम अधिनियम के मुफ्त टेम्पलेट और सैंपल यहाँ डाउनलोड करें।

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Courts

What is माध्यस्थम अधिनियम (Arbitration Act)?

माध्यस्थम अधिनियम (Arbitration Act) वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके द्वारा विवादित पक्ष अपने मामले को न्यायालय (Civil Court) की लंबी और जटिल प्रक्रिया के बजाय एक निष्पक्ष तीसरे पक्ष (माध्यस्थ/Arbitrator) के पास ले जाते हैं। भारत में यह संलग्नकीकरण एवं माध्यस्थम अधिनियम, 1996 (Arbitration and Conciliation Act, 1996) द्वारा शासित है।

यह अधिनियम UNCITRAL (यूएनसीआईटीआरएएल) मॉडल कानून पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य विवादों का तेजी से निपटान करना है। धारा 8 के तहत, यदि पक्षों के बीच माध्यस्थम समझौता (Arbitration Agreement) है, तो न्यायालय मामले की सुनवाई करने से इनकार कर देता है और पक्षों को माध्यस्थम की ओर निर्देशित करता है। धारा 11 माध्यस्थ की नियुक्ति की प्रक्रिया तय करती है।

माध्यस्थ द्वारा दिया गया निर्णय 'माध्यस्थम पुरस्कार' (Arbitral Award) कहलाता है, जिसे धारा 36 के तहत न्यायालय की डिक्री (Decree) के समान ही प्रवर्तनीय (Enforceable) माना जाता है। धारा 34 के तहत सीमित आधारों पर (जैसे—सार्वजनिक नीति के विरुद्ध या पक्ष को सुनवाई का अवसर न मिलना) ही इस पुरस्कार को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। कोई भी व्यापारिक पक्ष, निगम या सरकारी एजेंसी इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकती है। भारतीय कानून में माध्यस्थम अधिनियम क्या है, इसे समझना व्यापारिक विवादों से बचने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

When This Format Required?

व्यावसायिक अनुबंध विवाद: जब दो कंपनियों या व्यापारियों के बीच आपूर्ति, सेवा या साझेदारी अनुबंध में विवाद हो और अनुबंध में माध्यस्थम खंड हो।

निर्माण और रियल एस्टेट: बिल्डर और खरीदार के बीच परियोजना देरी, गुणवत्ता या भुगतान संबंधी विवादों के लिए।

अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य: भारतीय और विदेशी कंपनियों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार या आयात-निर्यात संविदाओं के विवाद।

बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन: ऋण अनुबंधों, एनपीए (NPA) वसूली और प्रतिभूतियों से जुड़े विवादों का तेज निपटान।

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Quick Overview

माध्यस्थम अधिनियम भारत में संलग्नकीकरण एवं माध्यस्थम अधिनियम, 1996 द्वारा शासित है। इन दस्तावेजों को निर्धारित न्यायालय शुल्क पर दाखिल किया जाता है; स्टाम्प पेपर पर शपथपत्र लगाना आवश्यक है। यह व्यापारिक विवाद, अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य और संविदा भंग के लिए उपयोग होता है। यह आमतौर पर 3-10 पेज लंबा होता है।

Step-by-Step Guide

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    चरण 1: माध्यस्थम समझौते की उपस्थिति सत्यापित करें

    जांचें कि पक्षों के बीच हस्ताक्षरित अनुबंध में माध्यस्थम खंड (Arbitration Clause) मौजूद है या नहीं। धारा 7 के तहत, लिखित समझौता होना माध्यस्थम शुरू करने के लिए सबसे पहली शर्त है।

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    चरण 2: विवाद का विवरण और राहत तैयार करें

    विवाद के तथ्य, अनुबंध की शर्तें और धनराशि का दावा स्पष्ट रूप से लिखें। इसमें यह बताएं कि प्रत्यर्थी ने अनुबंध के कौन से प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

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    चरण 3: धारा 11 के तहत नियुक्ति आवेदन (यदि आवश्यक हो)

    यदि पक्ष माध्यस्थ के नाम पर सहमत नहीं हो सकते, तो धारा 11 के तहत उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में माध्यस्थ नियुक्त कराने का आवेदन दाखिल करें।

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    चरण 4: माध्यस्थम नोटिस जारी करें

    प्रत्यर्थी को औपचारिक माध्यस्थम नोटिस भेजें। नोटिस में विवाद का सारांश, माध्यस्थम समझौते का संदर्भ और माध्यस्थ की नियुक्ति के लिए 30 दिन का समय दें।

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    चरण 5: कथन और प्रतिकथन (Statements) दाखिल करें

    माध्यस्थ के समक्ष अपना दावा कथन (Statement of Claims) दाखिल करें। प्रत्यर्थी द्वारा प्रतिकथन (Defence Statement) दाखिल करने के बाद सुनवाई और साक्ष्य प्रक्रिया शुरू होती है।

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    चरण 6: माध्यस्थम पुरस्कार और निष्पादन (Enforcement)

    सुनवाई पूरी होने पर माध्यस्थ 'माध्यस्थम पुरस्कार' जारी करता है। यदि प्रत्यर्थी पुरस्कार का पालन नहीं करता है, तो धारा 36 के तहत उपयुक्त न्यायालय में पुरस्कार को निष्पादित (Execute) कराने का आवेदन दाखिल करें।

Disclaimer: This template is provided for general informational and drafting reference purposes only. It does not constitute legal advice. Stamp duty, registration, and procedural requirements may vary by state. Consult a qualified advocate before executing or filing any legal document. For more details, see our Disclaimer.