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विवाह विषयक (Matrimonial) Format India — Free Templates & Samples

विवाह विषयक (Matrimonial) कानून भारत में विवाह संबंधी विवादों जैसे—तलाक, भरण-पोषण, क्रूरता और स्त्रीधन को निपटाते हैं। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) जैसे कानूनों के तहत ये दस्तावेज़ पीड़ित पक्ष को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं। तलाक याचिका, भरण-पोषण आवेदन और स्त्रीधन वापसी के मुफ्त टेम्पलेट और सैंपल यहाँ डाउनलोड करें।

Last Updated: Reviewed By: Legal Team
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What is विवाह विषयक (Matrimonial)?

विवाह विषयक (Matrimonial) कानून वह विधिक ढांचा है जो भारत में विवाह के दायित्वों, अधिकारों और विवाह संबंधी विवादों का निपटान करता है। यह मुख्य रूप से हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 द्वारा शासित है, जबकि अंतर-जातीय या अंतर-धर्म विवाहों के लिए विशेष विवाह अधिनियम, 1954 लागू होता है।

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 विवाह विच्छेद (Divorce) के आधार बताती है, जैसे—क्रूरता (Cruelty), व्यभिचार (Adultery), वनप्रस्थ (Desertion) 2 वर्ष से अधिक, या मानसिक विकार। धारा 13बी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) का प्रावधान देती है, जिसमें 6 महीने का शीतल प्रलय (Cooling-off period) होता है।

विवाहित महिलाओं के भरण-पोषण का अधिकार पहले CrPC की धारा 125 के तहत था, जो अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 144 के तहत विनियमित है। स्त्रीधन (Stridhan) की वापसी का अधिकार धारा 27 के तहत है। विवाह संबंधी शिकायतें पारिवारिक न्यायालय (Family Court) में दाखिल की जाती हैं। कोई भी पति या पत्नी इन याचिकाओं को दाखिल कर सकता है। भारतीय कानून में विवाह विषयक क्या है, इसे समझना वैवाहिक संकट से निपटने और अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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When This Format Required?

शारीरिक या मानसिक क्रूरता: जब पति या पत्नी पर शारीरिक अत्याचार, मानसिक प्रताड़ना या दहेज उत्पीड़न किया जा रहा हो।

वनप्रस्थ (Desertion): जब पति या पत्नी बिना किसी वैध कारण के 2 वर्ष से अधिक समय तक साथ छोड़कर चला गया हो।

भरण-पोषण न मिलना: जब पति अपनी पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने से इनकार कर रहा हो या उन्हें घर से निकाल दिया गया हो।

आपसी सहमति से अलग होना: जब पति-पत्नी दोनों को यह महसूस हो कि वे एक साथ नहीं रह सकते और वे आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते हैं।

Quick Overview

विवाह विषयक कानून भारत में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955, विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) द्वारा शासित हैं। इन्हें निर्धारित न्यायालय शुल्क पर पारिवारिक न्यायालय में दाखिल किया जाता है। यह तलाक, भरण-पोषण, स्त्रीधन और क्रूरता के मामलों के लिए उपयोग होता है। यह आमतौर पर 5-15 पेज लंबा होता है।

Step-by-Step Guide

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    चरण 1: तलाक का वैध आधार और धारा तय करें

    निर्धारित करें कि आप एकतरफा तलाक (धारा 13 - क्रूरता, व्यभिचार, वनप्रस्थ) चाहते हैं या सहमति से तलाक (धारा 13बी)। इसके अलावा, क्या आपको भरण-पोषण (धारा 144 BNSS) या स्त्रीधन वापसी की याचिका दाखिल करनी है।

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    चरण 2: पक्षकारों और विवाह का विवरण दर्ज करें

    वादी और प्रत्यर्थी का पूरा नाम, उम्र, पता और विवाह की तारीख, स्थान लिखें। विवाह प्रमाणपत्र या विवाह के फोटो का विवरण सबूत के रूप में दें।

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    चरण 3: विवाह से उत्पन्न तथ्य और विवाद लिखें

    शादी के बाद की घटनाओं का कालानुक्रम (Chronological) विवरण दें। क्रूरता, मानसिक शोषण, या वनप्रस्थ (Desertion) की घटनाओं को तारीख के साथ स्पष्ट रूप से ड्राफ्ट करें।

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    चरण 4: भरण-पोषण और स्त्रीधन का दावा जोड़ें

    यदि आप महिला हैं, तो अपनी और बच्चों की देखभाल के लिए अंतरिम और स्थायी भरण-पोषण (Maintenance) की राशि का दावा करें। साथ ही, स्त्रीधन (Stridhan) की वस्तुओं की सूची बनाएं।

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    चरण 5: प्रार्थना (Prayer) और न्यायालय शुल्क

    पारिवारिक न्यायालय से विवाह विच्छेद की डिक्री, भरण-पोषण, और शेष राहतों की प्रार्थना करें। दावे के अनुसार निर्धारित न्यायालय शुल्क (Court Fee) का भुगतान करें।

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    चरण 6: शपथपत्र और प्रमाण दस्तावेज संलग्न करें

    याचिका के साथ अपना शपथपत्र (Affidavit) लगाएं। विवाह प्रमाणपत्र, पति का वेतन स्लिप/आय प्रमाण, निवास प्रमाण और क्रूरता के मेडिकल या अन्य सबूत परिवार न्यायालय में प्रस्तुत करें।

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Disclaimer: This template is provided for general informational and drafting reference purposes only. It does not constitute legal advice. Stamp duty, registration, and procedural requirements may vary by state. Consult a qualified advocate before executing or filing any legal document. For more details, see our Disclaimer.