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₹106 करोड़ मुआवज़े की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा- कोयला सप्लाई ही मिलेगा समाधान

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश इंडस्ट्रीज की ₹106 करोड़ मुआवज़े की मांग खारिज करते हुए कहा कि निलंबित अवधि के लिए कोयला सप्लाई ही उचित राहत होगी। - भारत संघ बनाम प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड

₹106 करोड़ मुआवज़े की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा- कोयला सप्लाई ही मिलेगा समाधान

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला आपूर्ति से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में स्पष्ट किया है कि कंपनी को मौद्रिक मुआवज़ा नहीं मिलेगा। अदालत ने कहा कि पहले के आदेशों के अनुसार केंद्र सरकार और SECL को केवल निर्धारित अवधि के लिए कोयला उपलब्ध कराना होगा।

न्यायालय ने यह भी कहा कि कंपनी को यह विकल्प दिया जाएगा कि वह किस तिथि के “करेंट प्राइस” के आधार पर कोयला लेना चाहती है-9 अप्रैल 2014 या 17 मई 2019।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला यूनियन ऑफ इंडिया बनाम प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड का है। 2006 में कोयला मंत्रालय ने कंपनी को मदानपुर (नॉर्थ) कोल ब्लॉक आवंटित किया था। बाद में आरोप लगा कि कंपनी ने निर्धारित उपयोग के बजाय कोयले को अपने कैप्टिव पावर प्लांट में डायवर्ट किया। इसके बाद 9 नवंबर 2011 को SECL ने कंपनी की कोयला आपूर्ति निलंबित कर दी।

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कंपनी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 2012 में निलंबन आदेश रद्द कर दिया और बाद में अपील भी खारिज कर दी। अदालत ने यह भी कहा कि जिस अवधि में कंपनी को कोयला नहीं मिला, उस दौरान हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए।

इसके बाद मामला कई चरणों से गुजरते हुए अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दोनों पक्ष पहले के आदेशों की अपनी-अपनी तरह से व्याख्या कर रहे हैं।

पीठ ने कहा,

“दोनों पक्ष अदालत के पूर्व आदेशों को अपने हित के अनुसार पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो सही नहीं है।”

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न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 2014 के आदेश में यह विकल्प दिया गया था कि सरकार मुआवज़ा देने के बजाय उस अवधि के लिए कोयला सप्लाई कर सकती है, जब आपूर्ति रोकी गई थी।

पीठ ने कहा,

“आदेशों को किसी भी तरह इस रूप में नहीं पढ़ा जा सकता कि केंद्र सरकार या SECL को मूल्य अंतर का नकद मुआवज़ा देना होगा।”

कंपनी ने अदालत से लगभग 106 करोड़ रुपये का मुआवज़ा मांगा था। उसका तर्क था कि जब कोयला आपूर्ति बंद थी, तब उसे ई-ऑक्शन से महंगे दाम पर कोयला खरीदना पड़ा।

हालांकि, केंद्र सरकार और SECL का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के अनुसार उन्हें मुआवज़ा नहीं बल्कि कोयला सप्लाई का विकल्प दिया गया था।

अदालत ने इस दलील से सहमति जताई और कहा कि विवाद का समाधान कोयला सप्लाई के माध्यम से ही होगा।

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अंततः सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की मुआवज़े की मांग खारिज कर दी।

अदालत ने निर्देश दिया कि:

• कंपनी को निलंबित अवधि के लिए कोयला सप्लाई किया जाएगा।

• सप्लाई नॉर्मल कोल लिंकज के आधार पर होगी, टेपरिंग आधार पर नहीं।

• कंपनी यह चुन सकती है कि कोयले की कीमत 9 अप्रैल 2014 या 17 मई 2019 की नीति और दरों के अनुसार तय की जाए।

• कंपनी द्वारा तिथि चुनने के बाद दो सप्ताह के भीतर फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट किया जाएगा।

• इसके बाद चार सप्ताह के भीतर आपूर्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इसी के साथ अदालत ने संबंधित मिसलेनियस एप्लीकेशन्स का निपटारा कर दिया।

Case Title: Union of India vs Prakash Industries Limited

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