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17 साल की लड़की ने माता-पिता संग जाने से किया इनकार, गुजरात हाईकोर्ट ने चिल्ड्रन होम भेजने का दिया आदेश

Vivek G.
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भंगी अनिलभाई गोवाभाई बनाम गुजरात राज्य एवं अन्य। गुजरात हाईकोर्ट ने 17 साल की किशोरी को माता-पिता संग जाने से इनकार पर मेहसाणा चिल्ड्रन होम भेजने का आदेश दिया।

17 साल की लड़की ने माता-पिता संग जाने से किया इनकार, गुजरात हाईकोर्ट ने चिल्ड्रन होम भेजने का दिया आदेश

गुजरात हाईकोर्ट में सोमवार को एक संवेदनशील हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान भावनात्मक दृश्य देखने को मिले। 16 वर्षीय किशोरी, जिसे उसके पिता ने कथित तौर पर “अवैध रूप से बंधक” बनाए जाने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, खुद कोर्ट में पेश हुई और साफ शब्दों में कहा-वह अपने माता-पिता के साथ नहीं जाना चाहती।

न्यायमूर्ति एन.एस. संजय गौड़ा और न्यायमूर्ति डी.एम. व्यास की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता पिता ने विशेष आपराधिक आवेदन (हैबियस कॉर्पस) दायर कर दावा किया था कि उनकी नाबालिग बेटी को प्रतिवादी संख्या 4 से 9 ने गैरकानूनी रूप से अपने पास रखा है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि लड़की का पता लगाकर उसे अदालत के समक्ष पेश किया जाए।

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सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से बताया गया कि किशोरी को ट्रेस कर लिया गया है और उसे कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।

कोर्ट में क्या बोली किशोरी

अदालत में मौजूद किशोरी ने स्पष्ट कहा कि वह दो दिन बाद 17 वर्ष की होने वाली है। उसने बताया कि वह घर से अपनी मर्जी से गई थी क्योंकि उसके माता-पिता उस पर ऐसे व्यक्ति से शादी करने का दबाव बना रहे थे, जिससे वह विवाह नहीं करना चाहती थी।

उसने अदालत से कहा कि प्रतिवादीगण ने उसका अपहरण नहीं किया। उसने यह भी बताया कि वह प्रतिवादी संख्या 4 से विवाह करना चाहती है, लेकिन अभी दोनों ही कानूनी विवाह योग्य आयु के नहीं हैं।

पीठ के सामने उसने कहा, “मैं 18 साल की होने तक इंतजार करूंगी और उसके बाद ही शादी करूंगी।”

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मां-बेटी की बातचीत भी बेनतीजा

सुनवाई के दौरान किशोरी की मां भी अदालत में मौजूद थीं। अदालत ने मां और बेटी को बातचीत का अवसर दिया। काफी देर तक चर्चा चली, लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि “लंबी बातचीत के बावजूद दोनों अपने मतभेद सुलझा नहीं सकीं।” किशोरी अपने निर्णय पर अडिग रही और उसने दो टूक कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ नहीं जाएगी।

उसने अनुरोध किया कि उसे या तो किरणभाई के साथ रहने की अनुमति दी जाए या फिर 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक नारी केंद्र में रहने दिया जाए।

अदालत की टिप्पणी

खंडपीठ ने कहा कि चूंकि किशोरी अभी नाबालिग है और वह अपनी मां के साथ जाने को तैयार नहीं है, ऐसे में अदालत के पास सीमित विकल्प हैं।

पीठ ने स्पष्ट किया, “किरणभाई को उसके साथ रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि उनका परिवार से कोई संबंध नहीं है।”

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अदालत का निर्णय

अंततः अदालत ने आदेश दिया कि किशोरी को मेहसाणा स्थित चिल्ड्रन होम में रखा जाए और वह वहां 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगी।

अदालत ने निर्देश दिया कि चिल्ड्रन होम, मेहसाणा उसकी देखरेख करेगा और 18 वर्ष की आयु पूरी होते ही उसे रिहा कर देगा।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पिता की शिकायत के आधार पर एक एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस को अनुमति दी गई कि वह किशोरी को मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए ले जा सकती है।

इसी आदेश के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Bhangi Anilbhai Govabhai vs State of Gujarat & Ors.

Case No.: R/Special Criminal Application (Habeas Corpus) No. 1099 of 2026

Decision Date: 16 February 2026

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