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8 साल से अटका टैक्स रिफंड: दिल्ली हाईकोर्ट ने माइक्रोसॉफ्ट इंडिया को 5.37 करोड़ रुपये ब्याज सहित देने का आदेश

CB News Desk
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माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम आयकर उप आयुक्त एवं अन्य - दिल्ली उच्च न्यायालय ने आधिकारिक लापरवाही की आलोचना करते हुए आयकर विभाग को 8 साल की देरी के बाद माइक्रोसॉफ्ट इंडिया को 5.37 करोड़ रुपये ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया।

8 साल से अटका टैक्स रिफंड: दिल्ली हाईकोर्ट ने माइक्रोसॉफ्ट इंडिया को 5.37 करोड़ रुपये ब्याज सहित देने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक सख्त और अहम फैसले में आयकर विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए Microsoft Corporation India Pvt. Ltd. को वर्षों से लंबित टैक्स रिफंड तुरंत जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि आठ साल तक वैध रिफंड रोकना न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि यह करदाताओं के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति विनोद कुमार ने 6 जनवरी 2026 को सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर शिकायत की थी कि फ्रिंज बेनिफिट टैक्स (FBT) से जुड़ा 5,37,77,310 रुपये का रिफंड आज तक नहीं मिला है।

कंपनी के वकीलों ने अदालत को बताया कि वर्ष 2017 में ही आयकर विभाग के आकलन अधिकारी ने यह राशि रिफंड योग्य मानी थी।

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हालांकि, इसी आदेश में एक अन्य राशि 6.94 करोड़ रुपये बाद में जारी कर दी गई, लेकिन 5.37 करोड़ रुपये का भुगतान अजीब तरह से अटका रहा।

याचिका में कहा गया कि यह देरी किसी कानूनी विवाद के कारण नहीं, बल्कि केवल “प्रक्रियात्मक लापरवाही” की वजह से हुई।

अदालत की अहम टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आयकर अधिकारियों के रवैये पर नाराज़गी जाहिर की।

पीठ ने साफ शब्दों में कहा,

“आठ वर्षों तक किसी करदाता का वैध रिफंड रोके रखना चौंकाने वाला है और यह अधिकारियों की अंतरात्मा को झकझोर देना चाहिए था।”

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अदालत ने यह भी कहा कि माइक्रोसॉफ्ट को अपना पैसा पाने के लिए हाईकोर्ट आना पड़ा, जो विभाग की “पूरी तरह असंवेदनशील” कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

कोर्ट ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि विभाग को अब भी 12 सप्ताह का समय चाहिए।

ब्याज और कानून की बात

कंपनी ने न सिर्फ मूल राशि, बल्कि Income Tax Act, 1961 की धारा 244 और 244A(1A) के तहत ब्याज की भी मांग की थी। अदालत ने माना कि जब रिफंड में देरी विभाग की गलती से हुई है, तो ब्याज देना पूरी तरह जायज़ है।

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कोर्ट का अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आयकर विभाग को निर्देश दिया कि:

• 5,37,77,310 रुपये की पूरी राशि

• लागू ब्याज सहित

• 15 फरवरी 2026 तक माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के बैंक खाते में जमा की जाए।

अदालत ने चेतावनी भी दी कि यदि तय तारीख तक भुगतान नहीं हुआ, तो डिप्टी कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स को 1 लाख रुपये का जुर्माना व्यक्तिगत रूप से अपनी जेब से देना होगा।

यह फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया कि करदाताओं के साथ ऐसी उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Case Title:- Microsoft Corporation India Pvt. Ltd. vs Deputy Commissioner of Income Tax & Others

Case Number:- W.P.(C) 5608/2025

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