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आय छुपाना पड़ा भारी: दिल्ली हाई कोर्ट ने ₹13,000 मासिक भरण-पोषण आदेश बरकरार रखा

Shivam
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दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी और दो बच्चों के लिए ₹13,000 मासिक अंतरिम भरण-पोषण बरकरार रखा, पति की आय छुपाने पर टिप्पणी की। - दिनेश कुमार बनाम नीति और अन्य।

आय छुपाना पड़ा भारी: दिल्ली हाई कोर्ट ने ₹13,000 मासिक भरण-पोषण आदेश बरकरार रखा

दिल्ली हाई कोर्ट ने पति और पत्नी दोनों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतरिम भरण-पोषण (maintenance) के विवाद में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने ₹13,000 प्रति माह की राशि को उचित मानते हुए बरकरार रखा और पति की आय को लेकर किए गए दावों पर गंभीर टिप्पणी की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला पति दिनेश कुमार और पत्नी नीती के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। दोनों की शादी 2014 में हुई थी और उनके दो नाबालिग बच्चे हैं। पत्नी ने आरोप लगाया कि उसे 2016 में घर से निकाल दिया गया और उसके बाद उसने भरण-पोषण के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की।

पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत याचिका दाखिल की, जबकि पहले से ही उसे धारा 125 CrPC के तहत ₹7,000 प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण मिल रहा था। बाद में ट्रायल कोर्ट ने ₹3,000 अतिरिक्त देने का आदेश दिया, जिसे अपीलीय अदालत ने बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया।

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न्यायमूर्ति डॉ. स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने पाया कि पति द्वारा अपनी वास्तविक आय के संबंध में पूरी जानकारी नहीं दी गई।

अदालत ने कहा,

“जब कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण जानकारी छुपाता है, तो यह माना जाता है कि वह जानकारी उसके खिलाफ जा सकती थी।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पति का यह दावा कि वह केवल ₹12,000 प्रति माह कमाता है, संदिग्ध है खासकर तब जब उसके पुराने बैंक रिकॉर्ड, निवेश और आयकर रिटर्न उसकी बेहतर आर्थिक स्थिति की ओर संकेत करते हैं।

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साथ ही, पत्नी के ₹30,000 कमाने के दावे को भी अदालत ने साक्ष्य के अभाव में स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने कहा कि पति एक शिक्षित व्यक्ति है और पहले व्यवसाय भी चला चुका है, इसलिए उसकी आय को न्यूनतम मजदूरी से भी कम मानना उचित नहीं होगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति की आय कम से कम ₹20,000 प्रति माह मानी जा सकती है।

अदालत ने यह भी माना कि पति पर केवल पत्नी और दो बच्चों की जिम्मेदारी है, इसलिए उनका भरण-पोषण सुनिश्चित करना उसका कर्तव्य है।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने ₹13,000 प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण को उचित ठहराया और इसे बरकरार रखा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से दिए जा रहे ₹7,000 (CrPC के तहत) को इस राशि में समायोजित (adjust) किया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि यह केवल अंतरिम व्यवस्था है और अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।

Case Details

Case Title: Dinesh Kumar vs Neeti & Ors.

Case Number: CRL.M.C. 6628/2022 & CRL.M.C. 3998/2023

Judge: Justice Dr. Swarana Kanta Sharma

Decision Date: 04 April 2026

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