Logo

दुकानों को ‘असुरक्षित’ बताकर बंद कराने की कार्रवाई रद्द: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा-रिपोर्ट के खिलाफ दोबारा जांच नहीं

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

अनूप उप्पल और अन्य बनाम जम्मू नगर निगम और अन्य, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दुकानों को असुरक्षित बताकर बंद कराने का आदेश रद्द किया, कहा-विशेषज्ञ रिपोर्ट के बाद दोबारा सुरक्षा जांच नहीं हो सकती।

दुकानों को ‘असुरक्षित’ बताकर बंद कराने की कार्रवाई रद्द: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा-रिपोर्ट के खिलाफ दोबारा जांच नहीं

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जम्मू नगर निगम (JMC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके जरिए एक इमारत की सुरक्षा जांच दोबारा कराने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने कहा कि जब कोर्ट के निर्देश पर इंजीनियरों की समिति पहले ही इमारत को सुरक्षित घोषित कर चुकी है, तो प्रशासन उसी मुद्दे को दोबारा खोल नहीं सकता।

न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की एकल पीठ ने यह भी कहा कि किसी तकनीकी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को बिना उचित कारण के नजरअंदाज करना कानून के खिलाफ है।

Read also:-ओडिशा हाईकोर्ट ने पुलिस उत्पीड़न के आरोपों पर याचिका खारिज की, कहा-उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाएं

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता कई दशकों से जम्मू के एक्सचेंज रोड स्थित एक इमारत में दुकानों में व्यवसाय चला रहे थे। यह दुकानें उनके लिए आजीविका का मुख्य स्रोत थीं।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

मामला तब शुरू हुआ जब मकान मालिकों ने नगर निगम के सामने आवेदन देकर इमारत को असुरक्षित घोषित करने की मांग की। इसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की एक रिपोर्ट में इमारत को असुरक्षित बताया गया। उसी आधार पर नगर निगम ने नोटिस जारी कर भवन को गिराने या मरम्मत करने का निर्देश दिया।

दुकानदारों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत के निर्देश पर इंजीनियरों की एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई, जिसने मौके का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट में अधिकांश दुकानों को सुरक्षित बताया। केवल एक दुकान में मामूली मरम्मत की जरूरत बताई गई।

विवाद कैसे बढ़ा

कोर्ट द्वारा पहले पारित आदेश के अनुसार नगर निगम को इंजीनियरिंग रिपोर्ट के आधार पर मामला पुनर्विचार करना था।

लेकिन नगर निगम आयुक्त ने इसके बजाय एक निजी पैनल फर्म से फिर से सुरक्षा ऑडिट कराने का आदेश जारी कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने इसे अदालत के आदेश की अवहेलना बताते हुए चुनौती दी।

अदालत की टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार अदालत के निर्देश पर विशेषज्ञ समिति जांच कर चुकी हो और उसकी रिपोर्ट रिकॉर्ड पर हो, तो प्रशासन को उसी के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

पीठ ने कहा, “जब किसी सक्षम अदालत के आदेश पर विशेषज्ञ समिति रिपोर्ट दे चुकी है, तो प्रशासनिक प्राधिकरण उस निष्कर्ष को अनदेखा कर नया जांच आदेश नहीं दे सकता।”

Read also:-पुलिसकर्मी को कार से टक्कर मारकर बोनट पर घसीटने के आरोप में आरोपी को जमानत नहीं: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भवन की संरचनात्मक सुरक्षा जैसे तकनीकी मामलों में न्यायालय या प्रशासन को विशेषज्ञों की राय का सम्मान करना चाहिए।

पीठ ने कहा कि बिना कारण के रिपोर्ट को खारिज करना और नया ऑडिट कराना न्यायिक आदेश की अवहेलना के समान है।

आजीविका पर प्रभाव पर कोर्ट की चिंता

अदालत ने यह भी नोट किया कि दुकानदारों की रोजी-रोटी इन दुकानों पर निर्भर है और लगभग दो वर्षों से दुकानें बंद रहने से उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।

पीठ ने टिप्पणी की कि यदि किसी इमारत को जानबूझकर असुरक्षित घोषित कराकर किरायेदारों को निकालने की कोशिश की गई है, तो यह कानून के दुरुपयोग का मामला हो सकता है।

Read also:-कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला: पिता का नाम रहते हुए भी बच्चे के सरनेम में मां का नाम जोड़ने की अनुमति

अदालत का अंतिम निर्णय

हाईकोर्ट ने 26 जुलाई 2025 के नगर निगम आयुक्त के आदेश को रद्द कर दिया।

साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि जिन दुकानों को इंजीनियरिंग समिति ने सुरक्षित घोषित किया है, उनमें दुकानदारों को तुरंत वापस काम शुरू करने दिया जाए।

जहां एक दुकान में मरम्मत की जरूरत बताई गई है, वहां भवन मालिकों को तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार मरम्मत कराने का निर्देश दिया गया।

इसके अलावा अदालत ने मुख्य सचिव, जम्मू-कश्मीर को निर्देश दिया कि शुरुआती “असुरक्षित” रिपोर्ट कैसे बनी इसकी जांच के लिए स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए।

यदि जांच में किसी अधिकारी की गलती सामने आती है, तो उसे दुकानदारों को मुआवजे के रूप में व्यक्तिगत रूप से भुगतान करना होगा।

Case Title: Anoop Uppal & Others vs Jammu Municipal Corporation & Others

Case No.: WP(C) No. 2153/2025 (with connected matters)

Decision Date: 05 March 2026

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates