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हनीट्रैप और ब्लैकमेल गैंग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, मेरठ ज़ोन में जांच के निर्देश

Shivam
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर मामले में याचिका वापस होने के बावजूद पुलिस को व्यापक जांच और सतर्कता के निर्देश दिए। - फौजिया और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

हनीट्रैप और ब्लैकमेल गैंग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, मेरठ ज़ोन में जांच के निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक गंभीर आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान समाज में फैल रहे हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के खतरे पर चिंता जताई। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति तो दे दी, लेकिन मामले को नजरअंदाज करने के बजाय पुलिस को व्यापक जांच के निर्देश जारी किए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला फौजिया और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य से संबंधित है। आरोपों के अनुसार, पहली याचिकाकर्ता ने व्हाट्सएप के जरिए एक व्यक्ति से संपर्क स्थापित किया और कथित रूप से उसे अपने जाल में फंसाया। बाद में उसे बिजनौर के एक होटल में बुलाया गया, जहां उसके साथ निजी संबंध बनाए गए और इस दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग की गई।

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बताया गया कि इन वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल कर उस व्यक्ति से बड़ी रकम की मांग की गई। मामले में अन्य याचिकाकर्ताओं पर भी संलिप्तता के आरोप हैं, जिनमें दो पुलिसकर्मी और एक स्थानीय वार्ड सदस्य शामिल बताए गए।

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सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला समाज में एक “गंभीर और चिंताजनक स्थिति” को दर्शाता है।

पीठ ने टिप्पणी की,

“यदि इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक सभ्य समाज में रहना कठिन हो जाएगा।”

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अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की गतिविधियां संगठित गिरोह के रूप में काम कर सकती हैं, जो निर्दोष लोगों को फंसाकर उनसे पैसे वसूलते हैं।

लंबी बहस के बाद, याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इस अनुरोध का समर्थन शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने भी किया।

हालांकि याचिका को वापस लेने की अनुमति दी गई, लेकिन अदालत ने मामले को यहीं समाप्त नहीं किया। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मेरठ ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को इस पूरे प्रकरण की गहन जांच करने का निर्देश दिया।

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कोर्ट ने आदेश दिया कि:

• मेरठ ज़ोन के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को सतर्क किया जाए

• यह जांच की जाए कि क्या इस तरह का कोई गिरोह सक्रिय है

• यदि ऐसे अन्य गिरोह मौजूद हों, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए

साथ ही, इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, मेरठ ज़ोन के आईजी और गृह विभाग के अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए गए।

अंततः, याचिका को वापस ली गई मानते हुए खारिज कर दिया गया, लेकिन आवश्यक दिशा-निर्देशों के साथ।

Case Details

Case Title: Fojiya and Others vs State of U.P. and Others

Case Number: Criminal Misc. Writ Petition No. 4089 of 2026

Judge: Justice J.J. Munir and Justice Tarun Saxena

Decision Date: March 30, 2026

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