Logo

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरोपी की बेटी पर कथित हमले के प्रयास से जुड़े मामले में हत्या की सजा में संशोधन किया।

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोष को बदलते हुए कहा कि घटना अचानक झगड़े में हुई, इसलिए सजा घटाकर पहले से भुगती अवधि तक सीमित की गई। - महेश सिंह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरोपी की बेटी पर कथित हमले के प्रयास से जुड़े मामले में हत्या की सजा में संशोधन किया।

अल्लाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अहम आपराधिक अपील में ट्रायल कोर्ट के हत्या (murder) के फैसले को आंशिक रूप से बदलते हुए इसे ‘गैर-इरादतन हत्या’ (culpable homicide) का मामला माना। अदालत ने कहा कि घटना अचानक हुए झगड़े और आवेश में हुई थी, न कि पूर्व नियोजित हत्या।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला वर्ष 2016 की घटना से जुड़ा है, जहां शाहजहांपुर में एक युवक की मौत हो गई थी। अभियोजन के अनुसार, मृतक ने आरोपियों को पैसा उधार दिया था और जब उसने रकम वापस मांगी, तो उसे बुलाकर उस पर हमला किया गया।

ट्रायल कोर्ट ने महेश सिंह सहित अन्य आरोपियों को धारा 302/149 IPC के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण करते हुए कहा कि घटना के समय दोनों पक्षों के बीच अचानक विवाद हुआ था। अदालत ने माना कि:

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

“रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक हुए विवाद और आवेश की स्थिति में हुई।”

कोर्ट ने यह भी देखा कि बचाव पक्ष के अनुसार घटना एक झगड़े के दौरान हुई, जहां स्थिति तेजी से बिगड़ी। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी होता है कि क्या हत्या का स्पष्ट इरादा था या नहीं।

“यह मामला अपवाद 4 (Exception 4) के अंतर्गत आता है, जहां बिना पूर्व योजना के अचानक झगड़े में घटना घटित होती है।”

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि घटना अचानक झगड़े में, बिना पूर्व तैयारी और बिना क्रूरता के हुई हो, तो उसे हत्या नहीं माना जा सकता।

न्यायालय ने पाया कि:

• घटना अचानक विवाद के दौरान हुई

• पूर्व नियोजन का स्पष्ट प्रमाण नहीं था

• आरोपी ने कोई “अनुचित लाभ” (undue advantage) नहीं लिया

• साक्ष्य यह नहीं दिखाते कि हत्या की ठोस मंशा थी

इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि मामला हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए कहा कि:

“आरोपियों का दोष धारा 302/149 IPC के बजाय धारा 304 (Part-I)/149 IPC के अंतर्गत माना जाएगा।”

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि आरोपियों को उतनी ही सजा दी जाए जितनी वे पहले ही जेल में काट चुके हैं। हालांकि, जुर्माना और डिफॉल्ट सजा को बरकरार रखा गया।

Case Details

Case Title: Mahesh Singh and Others vs State of U.P.

Case Number: Criminal Appeal No. 1880 of 2019 (with connected appeal)

Judge: Justice Siddhartha Varma and Justice Jai Krishna Upadhyay

Decision Date: 23 April 2026

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates