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पीड़िता की गवाही पर भरोसा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1986 के दोषसिद्धि आदेश को बरकरार रखा

Shivam
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1986 के दुष्कर्म दोषसिद्धि आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज की, कहा कि पीड़िता की गवाही और मेडिकल साक्ष्य विश्वसनीय हैं। - अमर नाथ सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य

पीड़िता की गवाही पर भरोसा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1986 के दोषसिद्धि आदेश को बरकरार रखा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक पुराने आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी की अपील को खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य विश्वसनीय और सुसंगत हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 1984 की घटना से जुड़ा है, जिसमें अभियुक्त पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि खेत में बकरी चराने के दौरान आरोपी ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।

मामले की सुनवाई के बाद, सत्र न्यायालय, आजमगढ़ ने 9 दिसंबर 1986 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और ₹5,000 के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी।

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अपीलकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है और गवाहों के बीच विरोधाभास हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कुछ महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत में पेश नहीं किया गया, जिससे अभियोजन का मामला कमजोर हो जाता है।

इसके अलावा, मेडिकल साक्ष्य को भी चुनौती दी गई और कहा गया कि चोटें गिरने से भी हो सकती हैं।

न्यायमूर्ति मनोज बजाज की एकल पीठ ने साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही स्पष्ट, सुसंगत और भरोसेमंद है।

अदालत ने टिप्पणी की,

“पीड़िता की गवाही पर विस्तृत जिरह के बावजूद कोई संदेह उत्पन्न नहीं हुआ और उसने आरोपी की पहचान स्पष्ट रूप से की।”

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कोर्ट ने यह भी माना कि मेडिकल रिपोर्ट पीड़िता के बयान का समर्थन करती है, जिसमें गंभीर चोटों और हालिया यौन हिंसा के संकेत पाए गए।

गवाहों के न पेश होने पर अदालत ने कहा कि

“सिर्फ इस आधार पर कि कुछ गवाहों की जांच नहीं हुई, अभियोजन के मामले पर संदेह नहीं किया जा सकता, खासकर जब मुख्य गवाह विश्वसनीय है।”

अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था और दोषसिद्धि उचित है।

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि,

“रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य न केवल आरोपी के दोष की पुष्टि करते हैं, बल्कि उसकी निर्दोषता के किसी भी दावे के विपरीत हैं।”

इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा।

Case Details

Case Title: Amar Nath Singh vs State of U.P.

Case Number: Criminal Appeal No. 3129 of 1986

Judge: Justice Manoj Bajaj

Decision Date: April 8, 2026

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