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शादी के झूठे वादे पर दुष्कर्म का मामला रद्द: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, यह सहमति से चला संबंध था, बाद में विवाद हुआ

Shivam
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर दर्ज दुष्कर्म का मामला रद्द करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से यह दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक चला सहमति-आधारित संबंध प्रतीत होता है। - संजय सरोज @ संजय कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य

शादी के झूठे वादे पर दुष्कर्म का मामला रद्द: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, यह सहमति से चला संबंध था, बाद में विवाद हुआ

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज रेप के मामले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी और शिकायतकर्ता महिला के बीच पांच साल तक चला रिश्ता शुरू से ही आपसी सहमति से था। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि FIR दर्ज होने के महज 17 दिन बाद ही दोनों ने शादी कर ली थी, और यह बात फैसले में अहम साबित हुई।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अगस्त 2019 का है, जब एक महिला ने प्रयागराज के कोलोनलगंज थाने में संजय सरोज के खिलाफ रेप, मारपीट और धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला के मुताबिक, वह 2014 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रयागराज आई थी, और संजय, जो उसका दूर का रिश्तेदार था, ने उसे यहां बसने में मदद की थी। दोनों लगातार संपर्क में रहे, और महिला का आरोप था कि शादी का झूठा वादा करके संजय ने उससे शारीरिक संबंध बनाए, जो वादा उसने कभी पूरा नहीं किया।

महिला ने पुलिस को बताया कि जब भी वह शादी के लिए कहती, संजय हिंसक हो जाता था। आखिरी झगड़ा 10 अगस्त 2019 को हुआ, जब इस मुद्दे पर बहस के बाद उसने महिला को मारा और धमकाया।

इसके बाद मामले में कई मोड़ आए। जांच के दौरान महिला के बयान बदलते रहे। FIR में उसने शादी के झूठे वादे की बात कही थी, लेकिन बाद में मैजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में उसने एक अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किए जाने और रिश्तेदारों के सामने "दिखावटी" शादी कराए जाने का जिक्र किया। दूसरी तरफ, मेडिकल जांच में महिला के शरीर पर किसी तरह की चोट नहीं मिली।

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फिर सबसे बड़ा मोड़ आया - 27 अगस्त 2019 को, यानी FIR दर्ज होने के सिर्फ 17 दिन बाद, संजय और महिला ने प्रयागराज के एक आर्य समाज मंदिर में दोनों परिवारों की मौजूदगी में विधिवत शादी कर ली। इसके बावजूद केस आगे बढ़ता रहा, और पुलिस ने जनवरी 2020 में चार्जशीट दाखिल कर दी। सितंबर 2021 में मैजिस्ट्रेट ने इस पर संज्ञान भी ले लिया, जिसके बाद संजय ने पूरे मामले को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।

जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि FIR में न तो घटना की कोई तारीख थी, न समय और न ही जगह, जहां कथित तौर पर उत्पीड़न शुरू हुआ था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि घटना के वक्त महिला 29 साल की पढ़ी-लिखी वयस्क थी - एम.ए., एल.एल.बी. और बी.एड डिग्रीधारी - जिससे यह मानना मुश्किल है कि वह पांच साल तक बिना किसी विरोध के धोखे में रही हो।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "इससे एक ही तार्किक निष्कर्ष निकलता है कि पीड़िता अपनी मर्जी से हर बार आरोपी से मिलने गई थी।" कोर्ट ने आगे कहा कि पांच साल तक चले रिश्ते के दौरान चुप्पी और रिश्ता बिगड़ने के बाद शिकायत दर्ज कराना, यह दिखाता है कि यह एक प्रेम संबंध था जो आगे चलकर टूट गया, न कि कोई आपराधिक कृत्य।

सुप्रीम कोर्ट के कई हाल के फैसलों का हवाला देते हुए बेंच ने दोहराया कि शादी का वादा तोड़ना और शुरू से ही झूठा वादा करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। चूंकि महिला ने कभी यह आरोप नहीं लगाया कि संजय की शुरू से ही शादी करने की कोई मंशा नहीं थी, इसलिए अपराध का जरूरी आधार ही गायब था।

हाईकोर्ट ने संजय सरोज की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही, 2020 की चार्जशीट और 2021 के संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले को आगे चलाना कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग के सिवा कुछ नहीं होगा।

Case Details

Case Title: Sanjay Saroj @ Sanjay Kumar v. State of U.P. and Another

Case Number: Application U/S 482 No. 752 of 2022

Judge: Justice Vivek Kumar Singh

Decision Date: 18 June 2026

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