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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पेंशन से फैमिली पेंशन नहीं कटेगी, मुआवजा 4.76 लाख से बढ़कर 15.22 लाख

Vivek G.
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श्रीमती मुग्गा देवी एवं अन्य बनाम मक्खन सिंह एवं अन्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत पेंशनर के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुआवजा 4.76 लाख से बढ़ाकर 15.22 लाख किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पेंशन से फैमिली पेंशन नहीं कटेगी, मुआवजा 4.76 लाख से बढ़कर 15.22 लाख

इलाहाबाद हाईकोर्ट की अदालत में सोमवार को माहौल गंभीर था। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक बुजुर्ग पेंशनर के परिवार को मिला मुआवजा बढ़ाने की मांग पर सुनवाई हो रही थी। अदालत ने साफ कहा-“पेंशन कोई दया नहीं, यह सेवा का प्रतिफल है। इसे मुआवजे से नहीं घटाया जा सकता।”

यह फैसला इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रथम अपील संख्या 1995/2024 में सुना।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 7 फरवरी 2018 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। जयप्रकाश सिंह, जो उस समय 73 वर्ष के थे और सेवानिवृत्त कर्मचारी थे, की दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वे हर महीने 23,936 रुपये पेंशन पा रहे थे।

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मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, मुरादाबाद ने 12 जुलाई 2024 को 4,76,620 रुपये मुआवजा तय किया था। लेकिन अधिकरण ने यह कहते हुए कि मृतक की पत्नी को 14,900 रुपये पारिवारिक पेंशन मिल रही है, केवल अंतर राशि 9,036 रुपये को आधार बनाकर मुआवजा तय किया।

परिवार ने इसी आधार को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

अदालत में क्या दलीलें दी गईं?

परिवार की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में साफ किया गया है कि पारिवारिक पेंशन को मुआवजे से नहीं घटाया जा सकता। वकील ने दलील दी, “मृतक की अंतिम पेंशन ही आय मानी जानी चाहिए, न कि पारिवारिक पेंशन का अंतर।”

बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि मृतक की उम्र 73 वर्ष थी, ऐसे में भविष्य की आय (फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स) का कोई आधार नहीं बनता। कंपनी ने अधिकरण के आदेश को सही बताया।

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कोर्ट की अहम टिप्पणी

न्यायमूर्ति संदीप जैन ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पेंशन, भविष्य निधि या बीमा राशि को ‘आर्थिक लाभ’ मानकर मुआवजे से नहीं घटाया जा सकता।

कोर्ट ने Sandeep Jain की एकलपीठ से फैसला सुनाते हुए कहा:

“पारिवारिक पेंशन सेवा का प्रतिफल है। यह दुर्घटना का परिणाम नहीं है। इसे मुआवजे से घटाना कानून के विपरीत है।”

अदालत ने National Insurance Co. Ltd. vs. Pranay Sethi और अन्य सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि पेंशन को मुआवजे से नहीं घटाया जा सकता।

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियम, 1998 के नियम 220-A का उल्लेख किया। इसमें 50 वर्ष से अधिक आयु वाले मृतक के मामले में 20% भविष्य की आय जोड़ने का प्रावधान है।

न्यायालय ने साफ कहा कि “नियम में ऊपरी आयु सीमा नहीं है। इसलिए 73 वर्ष की आयु होने के बावजूद 20% भविष्य की आय जोड़ी जाएगी।”

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मुआवजे की नई गणना

अदालत ने मृतक की पूरी पेंशन 23,936 रुपये को मासिक आय माना। वार्षिक आय 2,87,232 रुपये तय की गई। उसमें से 1/4 व्यक्तिगत खर्च घटाकर 2,15,424 रुपये निर्भरता आय निकाली गई।

इस पर 20% भविष्य की आय जोड़कर कुल वार्षिक निर्भरता 2,58,509 रुपये बनी। 73 वर्ष की आयु के अनुसार 5 का गुणक (मल्टीप्लायर) लगाया गया।

इस तरह आश्रितों को कुल 12,92,545 रुपये निर्भरता हानि के रूप में मिले।

इसके अलावा पांचों आश्रितों को 40-40 हजार रुपये ‘लॉस ऑफ कंसोर्टियम’ यानी पारिवारिक स्नेह हानि के लिए दिए गए। साथ ही 15-15 हजार रुपये अंतिम संस्कार और संपत्ति हानि के लिए जोड़े गए।

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अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने कुल मुआवजा 15,22,545 रुपये तय किया, जो पहले के 4,76,620 रुपये से तीन गुना से अधिक है। इस पर 7% वार्षिक ब्याज भी मिलेगा।

अदालत ने बीमा कंपनी को दो महीने के भीतर बढ़ी हुई राशि जमा करने का निर्देश दिया। पहले दी गई रकम को समायोजित करने की छूट भी दी गई।

अपील स्वीकार करते हुए अधिकरण का आदेश संशोधित कर दिया गया।

Case Title: Smt. Mugga Devi & Ors vs Makkhan Singh & Ors

Case No.: FAFO No. 1995 of 2024

Decision Date: January 12, 2026

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