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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रतापगढ़ में हुए दोहरे एसिड हमले के मामले में आजीवन कारावास की सजा में संशोधन किया

Shivam
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जगदम्बा हरिजन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य - इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2014 के प्रतापगढ़ एसिड हमले के मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा लेकिन आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 14 साल के कठोर कारावास में बदल दिया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रतापगढ़ में हुए दोहरे एसिड हमले के मामले में आजीवन कारावास की सजा में संशोधन किया

लखनऊ खंडपीठ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में गुरुवार को एक बहुचर्चित दोहरे एसिड अटैक मामले में फैसला सुनाया गया। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि को सही ठहराया, लेकिन उम्रकैद की सजा को घटाकर 14 वर्ष की कठोर कारावास में बदल दिया। यह मामला वर्ष 2014 में प्रतापगढ़ जिले में हुई एक दर्दनाक घटना से जुड़ा है

मामले की पृष्ठभूमि

यह अपील जगदम्बा हरिजन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (क्रिमिनल अपील संख्या 1841/2018) में दायर की गई थी

अभियोजन के अनुसार, 7/8 मई 2014 की रात लगभग 2 बजे, प्रतापगढ़ के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र में आरोपी ने घर में घुसकर सुमन देवी और फूलन देवी पर तेजाब फेंका। दोनों गंभीर रूप से झुलस गईं। इलाज के दौरान सुमन देवी की 22 मई 2014 को और फूलन देवी की 29 मई 2014 को मौत हो गई

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ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 326-A (एसिड अटैक), 452 (घर में घुसकर हमला) और 323 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एफआईआर में देरी, गवाहों की विश्वसनीयता और जांच की कमियों का मुद्दा उठाया। हालांकि, पीठ ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि गंभीर रूप से झुलसी पीड़िताओं को अस्पताल पहुंचाना प्राथमिकता थी। “ऐसी परिस्थितियों में एफआईआर में देरी स्वाभाविक है,” पीठ ने टिप्पणी की

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मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं की मृत्यु “सेप्टीसीमिया शॉक” से हुई, जो गहरे जलने के घावों का परिणाम था। अदालत ने स्पष्ट किया कि इलाज में कथित कमी का तर्क आरोपी को राहत नहीं दे सकता, क्योंकि मूल कारण एसिड अटैक ही था

गवाहों के बयानों पर अदालत ने भरोसा जताया। पीठ ने कहा, “केवल इसलिए कि गवाह मृतकों के रिश्तेदार हैं, उनकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता।”

फैसले में अदालत ने एसिड हमलों को “क्रूरतम अपराधों में से एक” बताया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे अपराध समाज की मूल संरचना को झकझोरते हैं

पीठ ने कहा कि इस प्रकार के हमले न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक जीवन को भी तबाह कर देते हैं।

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अदालत ने पाया कि अभियोजन ने संदेह से परे आरोपी का अपराध सिद्ध किया है। इसलिए दोषसिद्धि बरकरार रखी गई

हालांकि, सजा पर विचार करते हुए अदालत ने आरोपी की जेल में बिताई अवधि (लगभग 13 वर्ष 9 माह), आपराधिक इतिहास का अभाव और पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा।

पीठ ने आदेश दिया कि उम्रकैद की सजा को घटाकर 14 वर्ष की कठोर कारावास किया जाता है। अन्य धाराओं के तहत जुर्माना और सजा यथावत रहेगी। आरोपी को 14 वर्ष की सजा पूरी करने के बाद, यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो, तो रिहा किया जाएगा

Case Title:- Jagdamba Harijan vs State of Uttar Pradesh

Case Number:- Criminal Appeal No. 1841 of 2018

Bench:-

• Justice Rajesh Singh Chauhan

• Justice Abdhesh Kumar Chaudhary

Date:- Delivered on: 12 February 2026

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