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दिल्ली उच्च न्यायालय ने अमन गुप्ता के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की, डीपफेक वीडियो और फर्जी खातों को हटाने का आदेश दिया

Shivam
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दिल्ली हाईकोर्ट ने अमन गुप्ता के नाम और पहचान के कथित दुरुपयोग, deepfake और अश्लील सामग्री पर रोक लगाते हुए कई प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट हटाने का आदेश दिया। - अमन गुप्ता बनाम जॉन डो/अशोक कुमार और अन्य।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अमन गुप्ता के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की, डीपफेक वीडियो और फर्जी खातों को हटाने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने boAt के सह-संस्थापक और “Shark Tank India” के निवेशक अमन गुप्ता को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए उनके नाम, तस्वीर, आवाज़ और पहचान का कथित दुरुपयोग करने वाले कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और व्यक्तियों के खिलाफ रोक लगाने का आदेश दिया है। अदालत ने AI-generated deepfake कंटेंट, फर्जी इवेंट प्रमोशन, अनधिकृत मर्चेंडाइज और आपत्तिजनक सामग्री को प्रथम दृष्टया अमन गुप्ता के व्यक्तित्व अधिकार और ट्रेडमार्क अधिकारों का उल्लंघन माना।

मामले की पृष्ठभूमि

अमन गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में वाणिज्यिक वाद दायर कर आरोप लगाया कि कई वेबसाइट्स, सोशल मीडिया अकाउंट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना अनुमति उनके नाम, तस्वीर, आवाज़, catchphrases और ब्रांड पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। याचिका में कहा गया कि कुछ प्लेटफॉर्म उन्हें paid speaker या event guest के रूप में दिखा रहे थे, जबकि कुछ वेबसाइट्स कथित तौर पर उनके नाम से टी-शर्ट, पोस्टर, GIFs और अन्य सामान बेच रही थीं।

याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ AI chatbots और deepfake सामग्री अमन गुप्ता की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित कर रही थी। अदालत के समक्ष अश्लील और pornographic सामग्री से जुड़े लिंक भी रखे गए, जिनमें दावा किया गया कि उनका नाम और पहचान गलत तरीके से जोड़ी गई।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथमदृष्टया यह स्पष्ट होता है कि वादी ने कम समय में व्यापक प्रतिष्ठा और सार्वजनिक पहचान हासिल की है। अदालत ने माना कि उनके नाम, छवि, आवाज़ और विशेष अभिव्यक्तियाँ उनकी विशिष्ट पहचान का हिस्सा हैं।

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अदालत ने कहा, “जिस तरह से प्रतिवादी उनके नाम, आवाज, व्यक्तित्व, नारों, पंजीकृत ट्रेडमार्क आदि का शोषण कर रहे हैं, वह सकारात्मक रूप से वादी के व्यक्तित्व के उस अंतर्निहित तथ्य को दर्शाता है जो केवल उन्हीं का है और किसी और का नहीं।”

कोर्ट ने विशेष रूप से AI और sexually explicit deepfake सामग्री पर चिंता जताई। आदेश में कहा गया कि ऐसी सामग्री तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करती है क्योंकि इससे प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।

हाईकोर्ट ने कई प्रतिवादियों को अमन गुप्ता के नाम, फोटो, आवाज़, वीडियो, GIFs, contact details या किसी भी personality attribute का बिना लिखित अनुमति इस्तेमाल करने से रोक दिया। अदालत ने AI या deepfake तकनीक के जरिए ऐसा कंटेंट बनाने, अपलोड करने या साझा करने पर भी रोक लगाई।

कोर्ट ने गूगल सहित कुछ प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे याचिका में सूचीबद्ध पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री को तुरंत हटाएं या ब्लॉक करें। साथ ही, संबंधित यूज़र अकाउंट्स की उपलब्ध जानकारी भी साझा करने को कहा गया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मुकदमे के दौरान नए infringing websites सामने आते हैं, तो अमन गुप्ता उन्हें रिकॉर्ड पर लाकर अतिरिक्त राहत मांग सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अमन गुप्ता के पक्ष में एकपक्षीय विज्ञापन-अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करते हुए कई वेबसाइट्स, सोशल मीडिया अकाउंट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को उनके व्यक्तित्व अधिकार, प्रचार अधिकार और पंजीकृत ट्रेडमार्क के कथित उल्लंघन से रोक दिया।

मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

Case Details:

Case Title: Aman Gupta v. John Doe/Ashok Kumar and Ors.

Case Number: CS(COMM) 462/2026

Judge: Justice Tushar Rao Gedela

Decision Date: May 7, 2026

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