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अनिल अंबानी समूह पर बैंक फ्रॉड मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI-ED से सीलबंद रिपोर्ट तलब की

Vivek G.
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ईएएस शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी समूह पर कथित बैंक फ्रॉड मामले में CBI और ED से सीलबंद रिपोर्ट मांगी। जानिए पूरी खबर।

अनिल अंबानी समूह पर बैंक फ्रॉड मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI-ED से सीलबंद रिपोर्ट तलब की

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (23-01-2026) को अनिल धीरूभाई अंबानी समूह से जुड़े कथित बैंक घोटाले के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसे पूर्व केंद्रीय सचिव ई.ए.एस. शर्मा ने दाखिल किया है।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता का आरोप है कि अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ रुपये के कर्ज का दुरुपयोग किया। बताया गया कि 2013 से 2017 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे जुड़ी कंपनियों को करीब 31,580 करोड़ रुपये का कर्ज मिला।

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कराई गई फॉरेंसिक ऑडिट में पैसों की हेराफेरी, शेल कंपनियों के जरिए लेनदेन और फर्जी एंट्रीज के संकेत मिले थे। इसके बावजूद, याचिका के अनुसार, शिकायत दर्ज करने में लगभग पांच साल की देरी हुई।

अदालत की सुनवाई और अहम टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियां अब तक अदालत में पेश नहीं हुई हैं, जबकि उन्हें पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था।

पीठ ने कहा,“न्याय के हित में हम अंतिम अवसर दे रहे हैं। संबंधित पक्षों को अब हर हाल में पेश होना होगा।”

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अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे नोटिस की तामील सुनिश्चित करें और रिपोर्ट दाखिल करें।

CBI और ED से क्या कहा गया?

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह देश का अब तक का सबसे बड़ा बैंक घोटाला हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं कर रहीं।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया,“एसबीआई की फॉरेंसिक ऑडिट के आधार पर ही FIR दर्ज हुई है। पैसों की हेराफेरी के संकेत मिले हैं।”

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को दस दिनों के भीतर सीलबंद रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

याचिका में कहा गया है कि:

• हजारों करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिए घुमाए गए

• फर्जी लेनदेन और कर्ज की ‘एवरग्रीनिंग’ की गई

• कई कंपनियां अपने पते पर मौजूद ही नहीं थीं

• बैंक अधिकारियों की भूमिका की जानबूझकर अनदेखी की गई

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला सिर्फ निजी कंपनियों का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की लूट से जुड़ा है।

अदालत का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने:

• CBI और ED से सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट मांगी

• अनिल अंबानी और ADAG को अंतिम अवसर दिया

• बॉम्बे हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को नोटिस की पुष्टि का आदेश दिया

• मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद तय की

Case Title: EAS Sarma v. Union of India & Ors.

Case No.: W.P.(C) No. 1217/2025

Case Type: Public Interest Litigation (PIL)

Decision Date: January 2026

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