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AP हाई कोर्ट ने एपी ट्रांसको टेंडर पर दायर जनहित याचिका खारिज की, कहा- 'देर से और बिना ठोस आधार के चुनौती'

Vivek G.
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कनिथि दीपक बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने AP TRANSCO टेंडर पर दायर PIL खारिज की। कोर्ट ने कहा– बिना ठोस सबूत टेंडर प्रक्रिया में दखल संभव नहीं।

AP हाई कोर्ट ने एपी ट्रांसको टेंडर पर दायर जनहित याचिका खारिज की, कहा- 'देर से और बिना ठोस आधार के चुनौती'

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को AP TRANSCO के बड़े बिजली प्रोजेक्ट्स से जुड़े टेंडरों पर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना ठोस सबूत और स्पष्ट आरोपों के, टेंडर प्रक्रिया में दखल नहीं दिया जा सकता। अंत में याचिका को प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता कनिथी दीपक ने चार अलग-अलग टेंडर नोटिफिकेशन और उनसे जुड़े परचेज ऑर्डर को चुनौती दी थी। ये टेंडर 220 केवी अंडरग्राउंड केबल बिछाने और सबस्टेशन अपग्रेडेशन से जुड़े थे, जो गुंटूर जिले के सीड कैपिटल रीजन में प्रस्तावित परियोजनाओं का हिस्सा हैं।

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याचिका में कहा गया कि टेंडर की योग्यता शर्तें (Qualification Requirements) इस तरह बनाई गई हैं कि केवल कुछ चुनिंदा कंपनियां ही पात्र हो सकें। खासतौर पर यह आरोप लगाया गया कि 100% कार्य निष्पादन का अनुभव, पिछले तीन साल का लाभ में होना, और ब्लैकलिस्टिंग से जुड़ी शर्तें मिलाकर एक विशेष निर्माता को फायदा पहुंचाने के लिए डाली गईं।

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याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि टेंडर शर्तें “लेवल प्लेइंग फील्ड” और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उनका कहना था कि:

• 290 किलोमीटर 220 केवी केबल का 100% निष्पादन पिछले 10 साल में होना एक अव्यवहारिक शर्त है।

• निर्माता से जुड़ी शर्तें आपस में विरोधाभासी हैं।

• लाभ, ब्लैकलिस्टिंग और लंबित मुकदमों को लेकर जो प्रावधान डाले गए हैं, वे चुनिंदा कंपनियों को बाहर करने के लिए हैं।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि “टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर अनिवार्य है।”

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राज्य की ओर से महाधिवक्ता ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का दायरा सीमित है। अदालत यह नहीं देखती कि फैसला ‘सही’ है या ‘बेहतर हो सकता था’, बल्कि यह देखती है कि फैसला कानून के मुताबिक लिया गया या नहीं।

उन्होंने कहा, “टेंडर तय करना और ठेका देना एक व्यावसायिक निर्णय है। अदालतें इसमें तभी दखल देती हैं जब स्पष्ट दुर्भावना या मनमानी साबित हो।”

राज्य ने यह भी तर्क दिया कि टेंडर 2024 में जारी हुए थे, जबकि याचिका 2025 के अंत में दायर की गई। तब तक टेंडर खुल चुके थे, अनुबंध हो चुके थे और काम शुरू भी हो गया था। ऐसे में देरी से दायर की गई PIL सुनवाई योग्य नहीं है।

अदालत की टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रवि चीमलापति की खंडपीठ ने रिकॉर्ड और दलीलों पर विचार करने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता ने मनमानी या दुर्भावना के आरोपों को ठोस तथ्यों से साबित नहीं किया।

पीठ ने स्पष्ट कहा, “जब तक टेंडर में स्पष्ट मनमानी या दुर्भावना न हो, अदालत को हस्तक्षेप से बचना चाहिए।”

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दुर्भावना (malafide) का आरोप लगाना आसान है, लेकिन उसे साबित करने का बोझ बहुत भारी होता है।

पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता स्वयं टेंडर प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे और न ही उन्होंने यह दिखाया कि वे पात्र थे लेकिन शर्तों के कारण बाहर कर दिए गए।

एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कोर्ट ने कहा, “जनहित याचिका का उद्देश्य वंचित और कमजोर वर्गों की आवाज बनना है। कंपनियों या ठेकेदारों के व्यावसायिक हितों के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।”

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जनहित याचिका की सीमाएं

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि PIL का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि यदि किसी कंपनी या ठेकेदार को टेंडर शर्तों से आपत्ति है, तो उसके लिए अन्य कानूनी उपाय उपलब्ध हैं।

कोर्ट ने माना कि यहां याचिका उन कंपनियों के हित में दायर की गई प्रतीत होती है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं और अपने अधिकारों की रक्षा स्वयं कर सकती हैं।

अंतिम निर्णय

सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि याचिका “भ्रमपूर्ण” है और इसमें टेंडर प्रक्रिया में किसी स्पष्ट मनमानी या दुर्भावना का प्रमाण नहीं दिया गया है।

अदालत ने जनहित याचिका को प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दिया। किसी भी पक्ष पर लागत (costs) नहीं लगाई गई। लंबित सभी अंतरिम आवेदन भी बंद कर दिए गए।

Case Title: Kanithi Deepak vs State of Andhra Pradesh & Others

Case No.: WP (PIL) No. 239 of 2025

Decision Date: 04 February 2026

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