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राजस्थान उच्च न्यायालय: अपीलीय प्राधिकारी कर्मचारी की स्वयं की अपील में सजा नहीं बढ़ा सकता

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राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की अपील पर बिना तय प्रक्रिया के सजा बढ़ाना अवैध है और ऐसी कार्रवाई रद्द की जा सकती है। - सुनील कुमार यादव बनाम जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड एवं अन्य।

राजस्थान उच्च न्यायालय: अपीलीय प्राधिकारी कर्मचारी की स्वयं की अपील में सजा नहीं बढ़ा सकता

जयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी द्वारा दायर अपील पर उसकी सजा बढ़ाना नियमों के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि ऐसी कार्रवाई तय प्रक्रिया का पालन किए बिना नहीं की जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सुनील कुमार यादव बनाम जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड से जुड़ा है। याचिकाकर्ता उस समय अलवर जिले में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे।

उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई जले हुए ट्रांसफॉर्मर समय पर जमा नहीं किए और उनसे निकला तेल भी जमा नहीं कराया, जिससे विभाग को नुकसान हुआ।

विभागीय जांच के बाद अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की सजा दी। याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की।

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अपील पर सुनवाई करते हुए अपीलीय प्राधिकारी ने न केवल मूल सजा को बरकरार रखा बल्कि उसे बढ़ाकर दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की सजा कर दिया।

याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि अपील करने पर सजा बढ़ाना न्यायसंगत नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने सभी ट्रांसफॉर्मर निर्धारित समय के भीतर जमा कर दिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि एक समिति की रिपोर्ट उनके पक्ष में थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया।

साथ ही यह तर्क दिया गया कि अपीलीय प्राधिकारी को अपीलकर्ता के खिलाफ सजा बढ़ाने का अधिकार इस तरीके से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

न्यायमूर्ति मुनुरी लक्ष्मण की पीठ ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि स्टॉक रजिस्टर में ट्रांसफॉर्मर जमा करने की तारीख स्पष्ट नहीं थी।

अदालत ने कहा,

“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि ट्रांसफॉर्मर समय पर जमा किए गए थे, इसलिए विभाग के निष्कर्षों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।”

हालांकि, अदालत ने अपील में सजा बढ़ाने की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई।

पीठ ने कहा,

“अपीलीय प्राधिकारी को यदि सजा बढ़ानी हो तो उसे अलग से स्वतः संज्ञान लेकर नोटिस देना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।”

अदालत ने पाया कि इस मामले में सजा बढ़ाने से पहले न तो उचित प्रक्रिया अपनाई गई और न ही याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिया गया।

इसी आधार पर कोर्ट ने अपीलीय प्राधिकारी द्वारा सजा बढ़ाने के आदेश को रद्द कर दिया।

हालांकि, मूल सजा यानी एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश बरकरार रखा गया।

Case Details:

Case Title: Sunil Kumar Yadav vs Jaipur Vidyut Vitran Nigam Ltd & Ors.

Case Number: S.B. Civil Writ Petition No. 1825/2017

Judge: Justice Munnuri Laxman

Decision Date: 20 April 2026

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