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बालिग महिला अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र: जबरन शादी केस में हाईकोर्ट का अहम आदेश

Shivam
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अजय कुमार साहू बनाम ओडिशा राज्य और अन्य - ओडिशा उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि वयस्क महिला स्वतंत्र रूप से रह सकती है, जबरन विवाह की निंदा की और पुलिस को सुरक्षा सुनिश्चित करने और हस्तक्षेप रोकने का आदेश दिया।

बालिग महिला अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र: जबरन शादी केस में हाईकोर्ट का अहम आदेश

कटक स्थित उड़ीसा उच्च न्यायालय में एक अहम सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी बालिग लड़की की इच्छा के खिलाफ की गई शादी न केवल उसके अधिकारों का हनन है, बल्कि समाज के लिए भी स्वस्थ संकेत नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें जबरन शादी का आरोप लगाया गया था

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अजय कुमार साहू द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिका में कहा गया था कि एक युवती को उसकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए मजबूर किया गया। इससे पहले अदालत ने 9 दिसंबर 2025 को आदेश दिया था कि युवती को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश किया जाए।

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6 जनवरी 2026 को काकटपुर थाना प्रभारी युवती को अदालत में लेकर पहुंचे। न्यायाधीशों ने युवती से सीधे बातचीत की।

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अदालत के समक्ष युवती का बयान

युवती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उसकी शादी जबरन कराई गई थी और इसी कारण उसे अपने ससुराल में रहना मुश्किल लग रहा था। उसने बताया कि वह अपनी मर्जी से वहां से चली गई।

उसने यह भी कहा कि वह न तो पति के साथ रहना चाहती है और न ही माता-पिता के साथ। युवती ने अदालत को बताया कि वह बालिग है, नौकरी करती है और अपनी आजीविका स्वयं कमाने में सक्षम है।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

पीठ न्यायमूर्ति हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मुराहारी श्री रमन ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब माता-पिता को आत्ममंथन करना चाहिए।

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पीठ ने टिप्पणी की,

“किसी लड़की की सहमति के बिना उसका विवाह कर देना एक स्वस्थ समाज के लिए अनुकूल नहीं है। बालिग लड़की का निर्णय सर्वोपरि है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।”

अदालत ने यह भी कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों पर अपने फैसले थोपना खत्म होना चाहिए और इसके लिए प्रशासन को संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है।

पुलिस को दिए गए निर्देश

अदालत ने माना कि चूंकि युवती स्वयं अदालत के सामने पेश हो चुकी है और अपना निर्णय स्पष्ट कर चुकी है, इसलिए याचिका को लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है।

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काकटपुर थाना प्रभारी को निर्देश दिया गया कि:

• युवती को उसके चुने हुए स्थान तक सुरक्षित पहुंचाया जाए

• माता-पिता या तथाकथित पति सहित किसी भी पक्ष द्वारा हस्तक्षेप न होने दिया जाए

• युवती की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित की जाए

• किसी भी शिकायत की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाए

अदालत का फैसला

इन टिप्पणियों और निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बालिग महिला अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और राज्य का दायित्व है कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।

Case Title: Ajay Kumar Sahoo v. State of Odisha & Others

Case Number: WPCRL No. 120 of 2025

Date of Order: 6 January 2026

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