Logo

बांग्लादेशी महिला की रिहाई याचिका खारिज, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का हाईकोर्ट का निर्देश

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

लीमा @ रिया शेख बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बांग्लादेशी महिला की रिहाई याचिका खारिज की, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का दिया निर्देश।

बांग्लादेशी महिला की रिहाई याचिका खारिज, ट्रायल 6 माह में पूरा करने का हाईकोर्ट का निर्देश

इंदौर खंडपीठ में सोमवार को एक अहम सुनवाई हुई। बांग्लादेश की नागरिक लीमा उर्फ रिया शेख ने अपनी निरंतर हिरासत को चुनौती देते हुए रिहाई की मांग की थी। लेकिन अदालत ने साफ किया कि फिलहाल उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी की जाए।

पीठ में न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी शामिल थे।

Read also:-40 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दोषियों को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई थी। यह हैबियस कॉर्पस याचिका थी, जिसमें दावा किया गया कि याचिकाकर्ता को अवैध और असंवैधानिक तरीके से हिरासत में रखा गया है।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता वर्ष 2020 के एक आपराधिक मामले में आरोपी हैं। उन पर भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं - जैसे अपहरण, अवैध बंधन और आपराधिक धमकी - के अलावा विदेशियों से जुड़े कानूनों के तहत भी आरोप लगे हैं।

हालांकि, अदालत ने पहले उन्हें जमानत दे दी थी। लेकिन मुकदमे की सुनवाई पूरी न होने के कारण उन्हें इंदौर जिला जेल स्थित निरोध केंद्र (डिटेंशन सेंटर) में रखा गया है। जिला दंडाधिकारी, इंदौर ने इस संबंध में आदेश भी पारित किया है।

याचिकाकर्ता की मांग

याचिका में कहा गया था कि:

• उन्हें तुरंत रिहा किया जाए और किसी मान्यता प्राप्त संस्था की निगरानी में रखा जाए।

• छह साल से अधिक समय तक हिरासत में रहने को न्यायिक हिरासत माना जाए।

• मुकदमे को छह महीने में पूरा करने का आदेश दिया जाए।

• संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

• मुआवजा दिया जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जमानत मिलने के बावजूद उन्हें निरंतर निरोध में रखना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

Read also:-रूह अफजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में 12.5% नहीं, 4% VAT लगेगा फल पेय के रूप में

अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि याचिकाकर्ता जेल में नहीं बल्कि डिटेंशन सेंटर में रखी गई हैं। इसलिए तत्काल रिहाई का आदेश देना उचित नहीं होगा।

पीठ ने कहा, “यह विवादित नहीं है कि मुकदमा अभी लंबित है और किसी भी समय अभियुक्त की उपस्थिति आवश्यक हो सकती है।”

अदालत ने आगे यह भी जोड़ा, “वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखना उचित है।”

हालांकि, अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया कि मुकदमा छह वर्षों से लंबित है।

Read also:-40 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दोषियों को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

अदालत का निर्णय

अदालत ने राज्य के वकील को निर्देश दिया कि अभियोजन एजेंसी को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने के लिए कहा जाए। इसमें गवाहों की पेशी और अन्य जरूरी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि छह महीने के भीतर मुकदमे में कोई प्रगति नहीं होती है, तो याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता होगी।

तत्काल रिहाई, मुआवजा या अधिकारियों के खिलाफ जांच संबंधी मांगों पर अदालत ने कोई राहत नहीं दी।

इसी के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Lima @ Riya Sheikh vs State of Madhya Pradesh & Others

Case No.: Writ Petition No. 5831 of 2026

Decision Date: 23 February 2026

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates