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बिहार विधानसभा चुनाव पर याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज की चुनौती सुनने से किया इनकार

Vivek G.
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जन सुराज पार्टी बनाम भारत निर्वाचन आयोग, सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी की बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को चुनौती देने वाली याचिका सुनने से इनकार किया, हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

बिहार विधानसभा चुनाव पर याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज की चुनौती सुनने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को माहौल गंभीर था, लेकिन पीठ का रुख शुरुआत से ही साफ दिख रहा था। प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी (JSP) की उस याचिका पर अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को ही रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि चुनाव में जनता के फैसले को इस तरह चुनौती नहीं दी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

जन सुराज पार्टी ने नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती दी थी। पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव के दौरान बिहार सरकार ने महिलाओं को ₹10,000 की राशि सीधे खाते में ट्रांसफर की, जिससे मतदाताओं को प्रभावित किया गया और “लेवल प्लेइंग फील्ड” खत्म हो गई।

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पार्टी का कहना था कि यह पैसा तब बांटा गया, जब आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू थी, जो सीधे तौर पर निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है।

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अदालत में क्या हुआ

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने जन सुराज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू. सिंह पेश हुए।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा,

“आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? अगर जनता ने नकार दिया, तो लोकप्रियता पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा रहा है।”

पीठ ने यह भी पूछा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत पूरी विधानसभा के चुनाव को एक साथ रद्द करने की मांग की जा सकती है।

याचिका में क्या तर्क दिए गए

जन सुराज ने कहा कि महिलाओं को ₹10,000 देने की योजना चुनावी “लालच” है। पार्टी के अनुसार,

• यह राशि सीधे मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए दी गई

• इससे विपक्षी दलों के साथ समानता नहीं रही

• पैसा राज्य के आकस्मिक कोष से निकाला गया, जो संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है

यह भी आरोप लगाया गया कि योजना की पात्रता स्वयं सहायता समूह ‘जीविका’ से जोड़ी गई और चुनाव के दौरान नए लाभार्थियों को जोड़ा गया।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका पूरी तरह से “समग्र चुनाव याचिका” जैसी है, जिसमें बिना ठोस आधार के पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा,

“अगर योजना पर आपत्ति थी, तो उसे समय रहते चुनौती दी जानी चाहिए थी। सीधे पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग स्वीकार्य नहीं है।”

जब याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि याचिका के हिस्सों को अलग किया जा सकता है और केवल ‘फ्रीबी’ के मुद्दे पर सुनवाई हो सकती है, तो अदालत ने उन्हें पटना हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

पीठ के रुख को देखते हुए जन सुराज पार्टी ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को यह स्वतंत्रता देते हुए खारिज किया कि पार्टी चाहे तो पटना हाईकोर्ट का रुख कर सकती है।

इसके साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि इस याचिका पर अब कोई और सुनवाई नहीं होगी।

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अदालत का अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए उसे वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने की अनुमति दी।

Case Title: Jan Suraaj Party vs Election Commission of India

Decision Date: February 2026

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