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25 साल से लंबित वेतन और पेंशन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, बिहार-झारखंड को देनदारियों के निपटारे का निर्देश

CB News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और झारखंड के बीच लंबित देनदारियों के बंटवारे पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए और कर्मचारियों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर कई विवादों का समाधान किया। - बिहार राज्य अर्ध सरकारी अराजपति कर्मचारी महासंघ और अन्य बनाम बिहार राज्य और अन्य

25 साल से लंबित वेतन और पेंशन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, बिहार-झारखंड को देनदारियों के निपटारे का निर्देश

करीब ढाई दशक से लंबित वेतन, पेंशन और अन्य सेवा लाभों के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए बिहार और झारखंड सरकारों को कर्मचारियों के बकाया भुगतान से जुड़े मामलों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली समिति की अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार कर लिया, जबकि मुआवजे और विलंबित भुगतान पर ब्याज जैसे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को आगे की सुनवाई के लिए खुला रखा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद वर्ष 2000 में बिहार पुनर्गठन अधिनियम के तहत झारखंड राज्य के गठन के बाद शुरू हुआ। बिहार की पांच सरकारी निगमों की परिसंपत्तियों और देनदारियों का अंतिम बंटवारा लंबे समय तक नहीं हो पाया। इसका सीधा असर हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ा, जिन्हें वर्षों तक वेतन, पेंशन और अन्य वैधानिक लाभ नहीं मिले।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि यह मामला केवल वित्तीय विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों के जीवन, आजीविका और गरिमा से जुड़ा मानवीय एवं संवैधानिक मुद्दा बन गया।

कोर्ट द्वारा गठित समिति ने विस्तृत जांच के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार कुल 2,274 सत्यापित कर्मचारियों में से 2,017 कर्मचारियों को उनके बकाया भुगतान किए जा चुके हैं।

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समिति ने पाया कि शेष मामलों में या तो दस्तावेजों का सत्यापन लंबित है या संबंधित कर्मचारी अथवा उनके कानूनी उत्तराधिकारी अभी तक संपर्क में नहीं आए हैं।

रिपोर्ट में वेतनमान, भविष्य निधि (EPF), दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के दावे, मृत कर्मचारियों के परिवारों को राहत तथा विलंबित भुगतान पर ब्याज जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच देनदारियों का बंटवारा उसी आधार पर माना जाएगा जो केंद्र सरकार के समक्ष तय प्रक्रिया में निर्धारित किया गया था।

कोर्ट ने समिति की इस राय से भी सहमति जताई कि कर्मचारी उन वेतन आयोगों का लाभ नहीं मांग सकते जिन्हें संबंधित निगमों ने अपने कार्यकाल में कभी औपचारिक रूप से स्वीकार ही नहीं किया था।

भविष्य निधि (EPF) के संबंध में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों और उनके उत्तराधिकारियों को वैधानिक अधिकारों के अनुरूप भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा,

“कर्मचारियों और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को देय भविष्य निधि एवं अन्य वैधानिक लाभों का भुगतान समिति द्वारा सुझाए गए तंत्र के अनुसार किया जाएगा।”

हालांकि, कोर्ट ने माना कि कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी विचारणीय हैं। इनमें दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के अधिकार, मृत कर्मचारियों के परिवारों को एकमुश्त मुआवजा, कल्याणकारी सहायता और वेतन एवं अन्य बकाया राशियों पर ब्याज का मुद्दा शामिल है।

समिति ने विलंबित वेतन भुगतान पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज तथा भविष्य निधि बकाया पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने की सिफारिश की थी। लेकिन इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी नहीं दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और झारखंड के बीच देनदारियों के बंटवारे, वेतन आयोग से संबंधित दावों तथा भविष्य निधि भुगतान के मुद्दों पर समिति की प्रमुख सिफारिशों को स्वीकार कर लिया। साथ ही दोनों राज्यों को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

मुआवजा, ब्याज और कुछ शेष दावों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय के लिए मामले को 1 सितंबर 2026 को पुनः सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया गया है।

Case Details

Case Title: Bihar State Ardh Sarkari Arajpati Karamchari Maha Sangh and Others v. State of Bihar and Others

Case Number: Writ Petition (Civil) No. 932 of 2022

Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: May 29, 2026

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