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लीज खत्म होने के बाद मुकदमा बेकार: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 17 साल पुराना सिविल सूट खारिज किया

Shivam
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2005 के नमक भूमि पट्टे के विवाद को खारिज कर दिया, यह फैसला सुनाते हुए कि पट्टा समाप्त होने के बाद मामला निष्प्रभावी हो गया है, और इस बात पर जोर दिया कि अदालतों को बिना किसी ठोस आधार के मुकदमेबाजी जारी नहीं रखनी चाहिए। - यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य बनाम महेशकुमार गोरधनदास गरोडिया

लीज खत्म होने के बाद मुकदमा बेकार: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 17 साल पुराना सिविल सूट खारिज किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि जब किसी मुकदमे का मूल कारण (cause of action) खत्म हो जाए, तो अदालत उसे जारी नहीं रख सकती। अदालत ने कहा कि “बेकार हो चुके मुकदमों” को खत्म करना न्यायालय की जिम्मेदारी है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मुंबई के कांजुर इलाके की बड़ी जमीनों से जुड़ा था, जिन्हें 1917 से 99 साल के लिए नमक उत्पादन हेतु लीज पर दिया गया था।

2004 में केंद्र सरकार ने इन लीज को समाप्त कर दिया। इसके खिलाफ महेशकुमार गोरधनदास गरोडिया ने 2005 में सिविल सूट दायर किया, जिसमें उन्होंने लीज को वैध और जारी रखने की मांग की।

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लेकिन इस बीच, लीज की अवधि 14 अक्टूबर 2016 को स्वतः समाप्त हो गई।

इसके बाद केंद्र सरकार ने दलील दी कि अब मुकदमा बेकार (infructuous) हो चुका है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति संदीप वी. मार्ने ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि:

“जब मुकदमे का आधार ही समाप्त हो जाए, तो उसे केवल अंतरिम आदेश (interim relief) बचाने के लिए जारी नहीं रखा जा सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि:

“कोर्ट का कर्तव्य है कि वह ऐसे मुकदमों को खत्म करे जो समय के साथ अर्थहीन हो चुके हैं।”

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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Shipping Corporation केस) का हवाला देते हुए कहा कि बाद की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

• जब सूट दाखिल हुआ था, तब कारण मौजूद था

• लेकिन बाद में लीज खत्म होने से वह कारण समाप्त हो गया

• ऐसे में, मुकदमा जारी रखने का कोई मतलब नहीं बचता

कोर्ट ने यह भी कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 151 के तहत अदालत के पास यह शक्ति है कि वह ऐसे मामलों को समाप्त कर सके।

साथ ही, केवल इस आधार पर मुकदमा जारी नहीं रखा जा सकता कि कोई अंतरिम आदेश लागू है।

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केंद्र सरकार (Applicants):

• लीज की अवधि खत्म हो चुकी है

• इसलिए मुकदमा स्वतः समाप्त हो गया

वादी (Respondent):

• उन्होंने लीज रिन्यू कराने की योजना बताई

• कहा कि कारण अभी भी जीवित है

लेकिन अदालत ने माना कि:

• रिन्यूअल की मांग मूल सूट में नहीं थी

• बाद में संशोधन की योजना पर्याप्त नहीं है

हाईकोर्ट ने सिटी सिविल कोर्ट का 2022 का आदेश रद्द कर दिया और स्पष्ट आदेश दिया कि:

• 2005 का सिविल सूट खारिज किया जाता है

• क्योंकि यह अब “infructuous” हो चुका है

साथ ही, अदालत ने फैसले पर रोक (stay) देने से भी इनकार कर दिया।

Case Details

• Case Title: Union of India & Ors. v. Maheshkumar Gordhandas Garodia

• Case Number: Civil Revision Application (ST.) No. 23914 of 2023

• Judge: Justice Sandeep V. Marne

• Decision Date: 17 March 2026

• Counsels: For Applicants: Anil Singh (ASG) with team For Respondent: Aditya Bapat with S.A.K. Najam-es-sani

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