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LPG सिलेंडर की कमी पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: केंद्र और DGFT से जवाब तलब, घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश

Shivam
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एलपीजी सिलेंडर की कमी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र और DGFT को नोटिस जारी किया, घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

LPG सिलेंडर की कमी पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: केंद्र और DGFT से जवाब तलब, घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की कथित कमी से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार और डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) को नोटिस जारी किया है। यह याचिका छह एलपीजी वितरकों ने दायर की थी, जिन्होंने अदालत से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त रसोई गैस उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इज़राइल-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है।

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अधिवक्ता श्याम डी. देवानी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि सरकार को Essential Commodities Act, 1955 (आवश्यक वस्तु अधिनियम) के तहत जारी आदेशों को सख्ती से लागू करना चाहिए, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त एलपीजी उपलब्ध हो सके।

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याचिका में यह भी मांग की गई कि वर्तमान आपूर्ति संकट के दौरान देश में उपलब्ध एलपीजी को पहले घरेलू वितरण के लिए आवंटित किया जाए और उसके बाद ही निर्यात प्रतिबद्धताओं को पूरा किया जाए।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने एलपीजी निर्यात रोकने के लिए कई बार अधिकारियों को प्रतिनिधित्व दिया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और न्यायमूर्ति राज डी. वाकोड़े की खंडपीठ ने कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसका व्यापक महत्व है।

पीठ ने कहा,

“वर्तमान रिट याचिका में उठाया गया मुद्दा गंभीर प्रकृति का है और अत्यंत महत्वपूर्ण है,” इसलिए संबंधित प्राधिकरणों को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करना होगा।

अदालत ने अंतरिम रूप से निर्देश दिया कि घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देने संबंधी सरकार की नीतियों का कड़ाई से पालन किया जाए।

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पीठ ने कहा,

“प्रतिवादी, विशेष रूप से कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड, यह सुनिश्चित करे कि घरेलू उपभोग के लिए एलपीजी का भंडारण और आपूर्ति पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की वर्तमान नीति के अनुसार हो।”

मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित की गई है।

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