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मूक-बधिर पीड़िता ने गुड़िया के जरिए बताया अपराध, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

Shivam
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मूक-बधिर पीड़िता की विश्वसनीय गवाही और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर दुष्कर्म मामले में आरोपी की सजा को बरकरार रखा। - नीलम कुमार देशमुख बनाम छत्तीसगढ़ राज्य

मूक-बधिर पीड़िता ने गुड़िया के जरिए बताया अपराध, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मूक-बधिर पीड़िता की गवाही भी विश्वसनीय हो सकती है, यदि वह सुसंगत और भरोसेमंद हो।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला वर्ष 2020 का है, जब एक मूक-बधिर युवती घर पर अकेली थी। आरोप है कि आरोपी, जो पीड़िता का रिश्तेदार था, घर में घुसकर उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए।

पीड़िता ने अपनी मां को इशारों के माध्यम से घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जांच के दौरान पीड़िता का बयान संकेत भाषा विशेषज्ञ की सहायता से दर्ज किया गया।

सत्र न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 450 और 376 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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हाईकोर्ट ने मामले के साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया और कहा कि मूक-बधिर व्यक्ति भी सक्षम गवाह होता है, बशर्ते उसकी बात स्पष्ट और समझने योग्य हो।

अदालत ने कहा:

“पीड़िता की गवाही संकेतों और हाव-भाव के माध्यम से दर्ज की गई, जो स्वाभाविक, सुसंगत और भरोसेमंद है।”

कोर्ट ने यह भी माना कि पीड़िता ने आरोपी की पहचान स्पष्ट रूप से की और घटना का विवरण लगातार एक जैसा रहा।

मेडिकल रिपोर्ट में भले ही बाहरी चोटें नहीं पाई गईं, लेकिन फॉरेंसिक जांच में वीर्य के निशान मिले, जो अभियोजन के पक्ष को मजबूत करते हैं।

अदालत ने कहा:

“केवल चोटों का अभाव यौन अपराध को नकारने का आधार नहीं हो सकता, विशेषकर तब जब अन्य साक्ष्य घटना की पुष्टि करते हों।”

अदालत ने पीड़िता की मां और अन्य गवाहों के बयान को भी महत्वपूर्ण माना, जिन्होंने घटना के तुरंत बाद पीड़िता की स्थिति और उसके द्वारा किए गए संकेतों की पुष्टि की।

कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की गवाही अन्य परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों से मेल खाती है, जिससे आरोप सिद्ध होते हैं।

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय के फैसले को सही ठहराया।

अदालत ने कहा कि:

“अभियोजन ने संदेह से परे अपराध सिद्ध किया है, और ट्रायल कोर्ट के निर्णय में कोई त्रुटि नहीं है।”

इसके साथ ही, अपील को निरस्त कर दिया गया और आरोपी को सजा भुगतने का निर्देश दिया गया।

Case Title: Neelam Kumar Deshmukh vs State of Chhattisgarh

Case Number: CRA No. 786 of 2023

Judge: Justice Ramesh Sinha (C.J.), Justice Ravindra Kumar Agrawal

Decision Date: 16 March 2026

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