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सिनेमा हॉल विवाद में पुलिस कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, DGP को निर्देश गिरफ्तारी में संवैधानिक गाइडलाइंस का पालन हो

Shivam
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सुजीत साओ और अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य और अन्य - छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भिलाई सिनेमा हॉल में हुई गिरफ्तारी के मामले में पुलिस के आचरण पर चिंता व्यक्त की, समीक्षा का आदेश दिया और गिरफ्तारी संबंधी सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करने को कहा।

सिनेमा हॉल विवाद में पुलिस कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, DGP को निर्देश गिरफ्तारी में संवैधानिक गाइडलाइंस का पालन हो

बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बुधवार को एक असामान्य लेकिन गंभीर मामला सामने आया। मामला एक सिनेमा हॉल में हुए मामूली विवाद से जुड़ा था, जो बाद में पुलिस कार्रवाई और कथित हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोपों तक पहुंच गया। कोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड को देखते हुए पुलिस अधिकारियों के आचरण पर गंभीर चिंता जताई और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को स्पष्ट निर्देश जारी किए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 22 अक्टूबर 2025 की रात वे अपने परिवार के साथ दुर्ग जिले के एक मॉल में फिल्म देखने गए थे। सीट पर बैठने के दौरान महिला के पैर में पहले से चोट होने के कारण हल्का सा शारीरिक स्पर्श हो गया, जिससे दोनों पक्षों में थोड़ी कहासुनी हुई। यह विवाद वहीं समाप्त हो सकता था, लेकिन थिएटर स्टाफ ने पुलिस को बुला लिया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने घटना को गलत रंग देते हुए भारतीय न्याय संहिता के तहत कई आपराधिक मामले दर्ज किए, जबकि कोई गंभीर अपराध नहीं हुआ था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को पुलिस चौकी ले जाया गया, जहां उनके साथ दुर्व्यवहार, अवैध हिरासत और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्हें हथकड़ी लगाकर सार्वजनिक रूप से घुमाया गया, मेडिकल जांच में देरी हुई और मजिस्ट्रेट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। एक याचिकाकर्ता ने अदालत में यह भी कहा कि पुलिस हिरासत के दौरान अपमानजनक नारे लगवाए गए और वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित हुए।

राज्य की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल ने इन आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की, सीसीटीवी फुटेज मौजूद है और आरोप निराधार हैं।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और रिकॉर्ड का अवलोकन किया। अदालत ने कहा कि मामले में ऐसे पहलू सामने आए हैं जो संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करते हैं।

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पीठ ने टिप्पणी की,

“यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कानून के शासन और नागरिकों की गरिमा पर सीधा प्रहार होगा। पुलिस को हर स्थिति में संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर काम करना चाहिए।”

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर विवादित तथ्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं कर रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा। हलफनामे में डीजीपी ने पुलिस कार्रवाई को उचित बताया, लेकिन कोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर यह माना कि कुछ प्रक्रियात्मक चूक हुई हो सकती है।

कोर्ट ने कहा,

“गिरफ्तारी, मेडिकल जांच और हिरासत से जुड़े मामलों में थोड़ी भी लापरवाही नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।”

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अदालत का अंतिम आदेश

हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए पुलिस विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। अदालत ने आदेश दिया कि:

• राज्य के DGP यह सुनिश्चित करें कि सभी पुलिस अधिकारी Arnesh Kumar, D.K. Basu और Satender Kumar Antil मामलों में तय सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस का पालन करें।

• गिरफ्तारी, मेडिकल जांच और हिरासत की प्रक्रिया में किसी भी तरह की चूक पर विभागीय कार्रवाई की जाए।

• किसी भी नागरिक को अपमान, अनावश्यक हिरासत या सार्वजनिक रूप से अपदस्थ करने जैसी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।

कोर्ट ने संबंधित थाने के प्रभारी अधिकारी के आचरण पर असंतोष जताते हुए DGP को उनके खिलाफ उचित स्तर पर समीक्षा और आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही याचिका को निस्तारित कर दिया गया।

Case Title:- Sujeet Sao & Others v. State of Chhattisgarh & Others

Case Number:- Writ Petition (Criminal) No. 11 of 2026

Date of Order:- 21 January 2026

Counsel for Petitioners:

• Mr. Awadh Tripathi, Advocate

Counsel for State:

• Mr. Vivek Sharma, Advocate General

• Assisted by Mr. Praveen Das, Additional Advocate General

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