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सिविल मुकदमे की आड़ में अपराध नहीं दबाया जा सकता: संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का सख़्त संदेश

Shivam
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सी.एस. प्रसाद बनाम सी. सत्यकुमार और अन्य - सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक संपत्ति विवाद में धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले को पुनर्जीवित किया, कहा कि दीवानी फैसला आपराधिक मुकदमे को नहीं रोक सकता।

सिविल मुकदमे की आड़ में अपराध नहीं दबाया जा सकता: संपत्ति विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का सख़्त संदेश

सुप्रीम कोर्ट में एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा अहम मामला सुना गया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई विवाद सिविल कोर्ट में तय हो चुका है, आपराधिक जांच और ट्रायल को रोका नहीं जा सकता। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के आदेश को गलत ठहराते हुए उसे निरस्त कर दिया

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला चेन्नई की कीमती अचल संपत्तियों से जुड़ा है। अपीलकर्ता डॉ. सी.एस. प्रसाद ने आरोप लगाया कि उनके पिता स्वर्गीय डॉ. सी. सत्यनारायण और माता के नाम की संपत्तियों को लेकर उनके बड़े भाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने धोखाधड़ी की।

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आरोप यह था कि माता-पिता की वृद्धावस्था और स्वास्थ्य स्थिति का फायदा उठाकर तीन सेटलमेंट डीड (संपत्ति हस्तांतरण दस्तावेज) तैयार और रजिस्टर कराए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति का लाभ लिया गया।

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इससे पहले, इसी संपत्ति को लेकर एक सिविल मुकदमा चला था, जिसमें सिविल कोर्ट ने सेटलमेंट डीड को वैध माना था। बाद में अपीलकर्ता की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े अपराधों में एफआईआर दर्ज की।

मद्रास हाईकोर्ट ने यह कहते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी थी कि मामला पूरी तरह सिविल प्रकृति का है। अदालत ने यह भी नोट किया था कि शिकायतकर्ता ने आपराधिक मामला दर्ज कराने में काफी देर की और सिविल केस में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया। हाईकोर्ट की राय थी कि आपराधिक मुकदमा न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाईकोर्ट के इस दृष्टिकोण से असहमति जताई। अदालत ने कहा कि सिविल और आपराधिक जिम्मेदारी एक ही तथ्यों से पैदा हो सकती है और दोनों साथ-साथ चल सकती हैं।

पीठ ने टिप्पणी की,

“सिर्फ सिविल कार्यवाही के आधार पर आपराधिक आरोपों को प्रारंभिक स्तर पर खत्म नहीं किया जा सकता, यदि शिकायत में अपराध के तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते हों।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट को शिकायत की सच्चाई, देरी या शिकायतकर्ता के आचरण पर इस स्तर पर निर्णय नहीं देना चाहिए था। ये सभी बातें ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होंगी।

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अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए मद्रास हाईकोर्ट का 22 अक्टूबर 2024 का आदेश रद्द कर दिया। इसके साथ ही चेन्नई की विशेष अदालत में लंबित आपराधिक मामला बहाल कर दिया गया है।

पीठ ने साफ किया कि ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से साक्ष्यों के आधार पर फैसला करेगा और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का अंतिम निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

Case Title: C.S. Prasad vs C. Satyakumar & Others

Case Number: Criminal Appeal No. 140 of 2026

(Arising out of SLP (Crl.) No. 397 of 2025)

Bench: Justice Sanjay Karol and Justice Prashant Kumar Mishra

Judgment Date: 8 January 2026

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