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बस में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में दोषी की सजा बरकरार: उड़ीसा हाईकोर्ट ने POCSO दोषसिद्धि को सही ठहराया

Vivek G.
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अविनाश डिगल @ पापुन डिगल बनाम ओडिशा राज्य, उड़ीसा हाईकोर्ट ने बस में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में आरोपी की POCSO सजा बरकरार रखी, कहा– यौन मंशा से स्पर्श भी यौन हमला है।

बस में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में दोषी की सजा बरकरार: उड़ीसा हाईकोर्ट ने POCSO दोषसिद्धि को सही ठहराया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बस यात्रा के दौरान नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ के मामले में आरोपी की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद है और उससे जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी घटना की पुष्टि करते हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी बच्चे के निजी अंग को यौन मंशा से छूना POCSO कानून के तहत “यौन हमला” की श्रेणी में आता है, भले ही उसमें त्वचा-से-त्वचा संपर्क जरूरी न हो।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला 26 अगस्त 2021 का है। उस दिन पीड़िता अपने परिवार के साथ ओडिशा के राइकीय से जी. उदयगिरि जाने के लिए पाखिराज बस में यात्रा कर रही थी।

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बताया गया कि बस जब यूको बैंक चौक, राइकीय के पास रुकी, तब एक व्यक्ति बस के बाहर से खिड़की के पास आया। आरोप है कि उसने खिड़की के अंदर हाथ डालकर लड़की के दाहिने स्तन को दबाया।

घटना के बाद लड़की ने शोर मचाया। उसके पिता बस से नीचे उतरे और आरोपी को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने कथित रूप से उनसे हाथापाई की और मौके से भाग गया। बाद में उसकी पहचान अभिनाश डिगल उर्फ पापुन डिगल के रूप में हुई।

पुलिस ने इस शिकायत पर मामला दर्ज किया और जांच के दौरान पीड़िता की उम्र करीब 17 वर्ष 5 महीने पाई गई।

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ट्रायल कोर्ट का फैसला

मामले की सुनवाई फुलबानी स्थित POCSO विशेष अदालत में हुई।

ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान पर विचार करते हुए आरोपी को:

• भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना)

• POCSO अधिनियम की धारा 8 (यौन हमला)

के तहत दोषी ठहराया।

अदालत ने उसे 3 साल की कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।

हालांकि डकैती से जुड़े आरोप (धारा 392 IPC) से आरोपी को बरी कर दिया गया था।

हाईकोर्ट में अपील

दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए आरोपी ने उड़ीसा हाईकोर्ट में अपील दायर की।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि:

• गवाहों के बयानों में विरोधाभास हैं

• बस में मौजूद स्वतंत्र गवाहों ने आरोपी के खिलाफ स्पष्ट बयान नहीं दिया

• घटना का तरीका भी संदिग्ध बताया गया

वहीं राज्य की ओर से कहा गया कि पीड़िता की गवाही स्पष्ट और विश्वसनीय है, जिसे अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी समर्थन देते हैं।

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अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति डॉ. संजीब कुमार पाणिग्रही की पीठ ने कहा कि पीड़िता की उम्र से जुड़े दस्तावेज - जैसे स्कूल रिकॉर्ड और मैट्रिक प्रमाणपत्र - विश्वसनीय साक्ष्य हैं और उनसे स्पष्ट है कि घटना के समय वह नाबालिग थी।

अदालत ने कहा:

“पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसके बयान को तत्काल खुलासे और अन्य परिस्थितियों से पर्याप्त समर्थन मिलता है।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि POCSO अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से बचाना है, इसलिए इसकी व्याख्या संकीर्ण तरीके से नहीं की जा सकती।

फैसले में कहा गया कि यदि कोई व्यक्ति यौन मंशा से बच्चे के निजी अंग को छूता है, तो यह कानून के तहत स्पष्ट रूप से “यौन हमला” माना जाएगा।

गवाहों पर अदालत की राय

हाईकोर्ट ने कहा कि कुछ गवाहों के hostile होने से पूरा मामला कमजोर नहीं हो जाता। अदालत को उन हिस्सों पर भरोसा करना चाहिए जो अन्य साक्ष्यों से मेल खाते हों।

ड्राइवर और कंडक्टर ने यह जरूर बताया कि लड़की ने बस में शोर मचाया था और उसके बाद बस रोकी गई। इससे घटना के तुरंत बाद की स्थिति की पुष्टि होती है।

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हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय

सभी साक्ष्यों और गवाहियों का समग्र मूल्यांकन करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित कर दिए हैं।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि उसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

इसी आधार पर अदालत ने आरोपी की अपील खारिज कर दी और उसकी सजा को बरकरार रखा।

Case Title: Abinash Digal @ Papun Digal v. State of Odisha

Case No.: CRLA No. 1051 of 2024

Decision Date: 27 February 2026

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