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भीड़ नियंत्रण SOP लागू: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा-कानून बनने तक नई गाइडलाइन ही रहेगी प्रभावी

Vivek G.
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कर्नाटक उच्च न्यायालय बनाम कर्नाटक राज्य एवं अन्य। कर्नाटक हाईकोर्ट ने भीड़ नियंत्रण SOP को कानून बनने तक लागू रखने का आदेश दिया, जनहित याचिका का निस्तारण।

भीड़ नियंत्रण SOP लागू: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा-कानून बनने तक नई गाइडलाइन ही रहेगी प्रभावी

बेंगलुरु में बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज कर्नाटक हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) तब तक लागू रहेगी, जब तक प्रस्तावित कानून पारित नहीं हो जाता।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है और याचिका का निस्तारण कर दिया गया है।

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यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में चीफ जज विभु बाखरू और सीएम पूनाचा की खंडपीठ के उदाहरण आया।

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याचिका में राज्य सरकार, कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड को पक्षकार बनाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जनहित याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई थी। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया था कि एक हालिया भीड़ त्रासदी के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए और यह बताया जाए कि क्या ऐसी घटना को रोका जा सकता था।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने 13 जनवरी 2026 की तारीख वाला ज्ञापन और ‘भीड़ नियंत्रण एवं बड़े आयोजनों के प्रबंधन’ से संबंधित SOP अदालत में प्रस्तुत किया।

अदालत की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक आदेश में कहा कि सरकार द्वारा तैयार SOP में न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (अदालत की सहायता के लिए नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता) के सुझावों को भी शामिल किया गया है।

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“राज्य द्वारा प्रस्तुत SOP को देखते हुए और यह ध्यान में रखते हुए कि संबंधित विधेयक पर भी विचार चल रहा है, हमें उचित लगता है कि यह SOP फिलहाल प्रभावी रहे,” पीठ ने कहा।

महाधिवक्ता ने यह भी बताया कि ‘कर्नाटक क्राउड कंट्रोल (मैनेजिंग क्राउड एट इवेंट्स एंड प्लेसेज़ ऑफ गैदरिंग) बिल, 2025’ को राज्य विधानसभा ने विचार-विमर्श के लिए संदर्भित किया है। साथ ही यह आश्वासन दिया गया कि विधानसभा इस विधेयक पर विचार करते समय SOP को भी ध्यान में रखेगी।

अदालत का फैसला

अदालत ने आदेश दिया कि 13 जनवरी 2026 की SOP तब तक लागू और प्रभावी रहेगी, जब तक प्रस्तावित विधेयक पारित होकर कानून का रूप नहीं ले लेता।

पीठ ने कहा, “हम इस याचिका में इससे आगे कोई और आदेश पारित करना आवश्यक नहीं समझते।”

हालांकि, अदालत ने एमिकस क्यूरी को यह स्वतंत्रता दी कि यदि भविष्य में कोई कारण उत्पन्न होता है तो वह याचिका को पुनर्जीवित (फिर से सूचीबद्ध) कराने का अनुरोध कर सकते हैं।

अंत में, अदालत ने एमिकस क्यूरी और सभी पक्षों के अधिवक्ताओं की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया और याचिका का निस्तारण कर दिया।

Case Title: High Court of Karnataka vs State of Karnataka & Ors.

Case No.: WP No. 16530 of 2025 (GM-RES-PIL)

Case Type: Writ Petition (Public Interest Litigation)

Decision Date: 23 February 2026

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