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आवारा सांड की टक्कर से मौत: गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा नगर निगम की अपील खारिज की, लापरवाही तय

Vivek G.
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वडोदरा नगर निगम बनाम मोमिनाबेन मालबुलभाई घनीवाला और अन्य। आवारा सांड से हुई मौत पर गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला। वडोदरा नगर निगम की अपील खारिज, 70% लापरवाही तय, मुआवजा बरकरार।

आवारा सांड की टक्कर से मौत: गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा नगर निगम की अपील खारिज की, लापरवाही तय

सड़क पर आवारा पशुओं की मौजूदगी को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। वडोदरा में सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने वडोदरा नगर निगम की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें निगम को 70% जिम्मेदार ठहराया गया था।

अदालत ने साफ कहा कि सार्वजनिक सड़कों को सुरक्षित रखना नगर निगम की वैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही के गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2007 का है। वडोदरा निवासी मकबूल गफ्फारभाई घानीवाला 27 सितंबर 2007 की शाम अपनी मोटरसाइकिल से जा रहे थे। करेळीबाग क्षेत्र में अचानक एक आवारा सांड सड़क पर दौड़ पड़ा और सीधी टक्कर हो गई।

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हादसे में उन्हें गंभीर सिर की चोटें आईं। कई अस्पतालों में करीब 53 दिन तक इलाज चला, दो बार सर्जरी भी हुई, लेकिन 29 नवंबर 2007 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पत्नी और परिजनों ने नगर निगम के खिलाफ मुआवजे की मांग करते हुए सिविल मुकदमा दायर किया।

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ट्रायल कोर्ट का फैसला

निचली अदालत ने साक्ष्यों और मेडिकल रिकॉर्ड का मूल्यांकन करते हुए माना कि हादसे के लिए मृतक की भी कुछ हद तक लापरवाही थी, लेकिन मुख्य जिम्मेदारी नगर निगम की है।

कोर्ट ने “रेस इप्सा लोक्विटर” (घटना स्वयं लापरवाही की ओर इशारा करती है) के सिद्धांत को लागू करते हुए निगम को 70% और मृतक को 30% जिम्मेदार ठहराया। इसके तहत लगभग 4.84 लाख रुपये मुआवजा और 9% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया।

नगर निगम ने हाईकोर्ट में दलील दी कि आवारा पशुओं को पकड़ना पुलिस का दायित्व है, निगम का नहीं। निगम के वकील ने कहा कि हादसा मृतक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग के कारण हुआ।

दूसरी ओर, मृतक के परिजनों की ओर से कहा गया कि आवारा पशुओं को सड़कों से हटाना नगर निगम की वैधानिक जिम्मेदारी है और इस कर्तव्य में लापरवाही से एक जान चली गई।

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अदालत की अहम टिप्पणियां

जस्टिस एम. के. ठाक्कर की पीठ ने स्पष्ट कहा,

“यदि नगर निगम अपने नियंत्रण और प्रबंधन में आने वाली सड़कों को सुरक्षित रखता, तो यह हादसा टल सकता था।”

अदालत ने बॉम्बे प्रांतीय म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि सड़कों से अवरोध हटाना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना निगम का कानूनी दायित्व है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आवारा सांड का सड़क पर आना अपने आप में लापरवाही की ओर इशारा करता है और ऐसी स्थिति में निगम को जवाबदेही से नहीं बचाया जा सकता।

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अंतिम निर्णय

हाईकोर्ट ने नगर निगम की अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा। साथ ही, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मुआवजे की राशि सार्वजनिक धन से दी जा रही है, इसलिए लापरवाह अधिकारियों की पहचान कर उनसे वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाए और तीन महीने में रिपोर्ट पेश की जाए।

इसी के साथ मामला यहीं समाप्त हुआ।

Case Title: Vadodara Municipal Corporation vs. Mominaben Malbulbhai Ghaniwala & Ors.

Case No.: First Appeal No. 519 of 2020

Case Type: Civil Appeal (Tort / Negligence)

Decision Date: 17 December 2025

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