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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- HAMA के तहत गोद लिए बच्चे के विदेश स्थानांतरण में CARA NOC जारी करने से इनकार नहीं कर सकता

Shivam
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि HAMA के तहत गोद लिए बच्चों के विदेश स्थानांतरण में CARA को नियमों के अनुसार NOC जारी करना अनिवार्य है। - गुर कौर (नाबालिग) और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- HAMA के तहत गोद लिए बच्चे के विदेश स्थानांतरण में CARA NOC जारी करने से इनकार नहीं कर सकता

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि हिंदू गोद लेना और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) के तहत हुए वैध गोद लेने के मामलों में भी केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (CARA) अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विदेश स्थानांतरण के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र(NOC) जारी करना CARA का दायित्व है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका एक नाबालिग बच्ची के दत्तक माता-पिता द्वारा दायर की गई थी, जो उसे कनाडा ले जाना चाहते थे। बच्ची को वर्ष 2019 में सिख रीति-रिवाजों के अनुसार गोद लिया गया था और बाद में 2021 में HAMA के तहत औपचारिक गोद लेने का दस्तावेज भी तैयार किया गया।

दत्तक माता-पिता ने संबंधित नियमों के तहत जिला मजिस्ट्रेट से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त की। इसके बावजूद, CARA ने NOC जारी करने के बजाय केवल “सपोर्ट लेटर” जारी किया और बाद में आवेदन को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि मामला HAMA से संबंधित है।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि 2021 के संशोधित दत्तक ग्रहण नियमों के अनुसार, जब जिला मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यापन हो चुका है, तब CARA को NOC जारी करना अनिवार्य है। यह भी तर्क दिया गया कि कनाडा हेग कन्वेंशन का सदस्य है, इसलिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाना CARA की जिम्मेदारी है।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि HAMA के तहत हुए गोद लेने के मामलों में CARA का अधिकार क्षेत्र सीमित है और इसलिए NOC जारी नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने नियमों की भाषा को स्पष्ट बताते हुए कहा कि Chapter IV-A का उद्देश्य ही ऐसे मामलों को कवर करना है, जहां HAMA के तहत गोद लिए गए बच्चे को विदेश ले जाना हो।

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अदालत ने कहा,

“नियमों की स्पष्ट भाषा यह दर्शाती है कि ऐसे मामलों में CARA को आगे की प्रक्रिया पूरी करनी ही होगी।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हेग कन्वेंशन के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना CARA की जिम्मेदारी है, न कि दत्तक माता-पिता की।

अदालत ने माना कि CARA द्वारा केवल सपोर्ट लेटर जारी करना और NOC न देना नियमों के विपरीत है।

अंततः न्यायालय ने निर्देश दिया कि CARA संबंधित कनाडाई प्राधिकरणों के साथ समन्वय करे, आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कराए और प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद याचिकाकर्ताओं को NOC जारी करे।

Case Detials

Case Title: Gur Kaur (Minor) & Ors. v. Union of India & Anr.

Case Number: W.P.(C) 16096/2024

Judge: Hon’ble Mr. Justice Sachin Datta

Decision Date: 20 April 2026

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