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लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे वयस्कों को सुरक्षा का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को संरक्षण देने का निर्देश दिया

Shivam
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्तियों को, चाहे वे लिव-इन में हों या विवाहित, जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा का अधिकार है और पुलिस संरक्षण दिया जाना चाहिए। - मीना अखिलेश यादव और अन्य बनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की राज्य सरकार और अन्य।

लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे वयस्कों को सुरक्षा का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को संरक्षण देने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि दो बालिग व्यक्तियों को, चाहे वे शादीशुदा हों या लिव-इन रिलेशनशिप में, जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को पुलिस संरक्षण देने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला मीना अखिलेश यादव और अन्य। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य सरकार और अन्य। (W.P.(CRL) 1091/2026) से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपनी जान और स्वतंत्रता को खतरे के मद्देनज़र सुरक्षा की मांग की थी।

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याचिका में कहा गया कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और अलग-अलग व्यक्तियों से विवाहित हैं। याचिकाकर्ता संख्या-1 ने आरोप लगाया कि उसके पति द्वारा लंबे समय से अपमान और उत्पीड़न किया जा रहा था, जिसके चलते उसने अपनी इच्छा से याचिकाकर्ता संख्या-2 के साथ रहना शुरू किया।

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बताया गया कि दोनों 25 फरवरी 2026 से हैदराबाद में साथ रह रहे थे, लेकिन वहां कथित रूप से परिवारजनों और स्थानीय पुलिस की ओर से धमकियों के कारण उन्हें दिल्ली आना पड़ा।

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।

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अदालत ने कहा:

“दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और उन्होंने अपनी इच्छा से अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनकी वैवाहिक स्थिति या लिव-इन रिलेशनशिप इस मामले में विचार का विषय नहीं है।”

पीठ ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह उनके बीच हुए समझौते (MoU) की वैधता पर विचार नहीं कर रही है, बल्कि केवल उनके सुरक्षा अधिकार पर ध्यान दे रही है।

राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी अदालत को आश्वस्त किया कि दिल्ली पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैयार है।

अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता आवश्यकता पड़ने पर संबंधित थाना, विशेष रूप से लोधी कॉलोनी थाने के SHO या बीट कांस्टेबल से संपर्क कर सकते हैं।

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अदालत ने आदेश दिया:

“पुलिस अधिकारी याचिकाकर्ताओं को आवश्यकतानुसार उचित सहायता और सुरक्षा प्रदान करेंगे।”

साथ ही यह भी कहा गया कि यदि याचिकाकर्ता किसी अन्य क्षेत्र में रहने लगते हैं, तो वे संबंधित थाने को अपनी जानकारी दें, और वहां की पुलिस भी उन्हें कानून के अनुसार सुरक्षा उपलब्ध कराए।

अंततः, याचिका को इन निर्देशों के साथ निस्तारित कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Meena Akhilesh Yadav & Anr. vs State Govt of NCT of Delhi & Ors.

Case Number: W.P.(CRL) 1091/2026

Judge: Justice Saurabh Banerjee

Decision Date: 06 April 2026

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