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दिल्ली उच्च न्यायालय के अनुसार, गृह मंत्रालय AGMUT IAS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है।

Shivam
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि AGMUT कैडर के IAS अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार MHA को वैध रूप से सौंपा जा सकता है। - भारत संघ एवं अन्य बनाम पद्मा जायसवाल आईएएस एवं संबंधित मामले

दिल्ली उच्च न्यायालय के अनुसार, गृह मंत्रालय AGMUT IAS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेश) कैडर के IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और दंड देने का अधिकार गृह मंत्रालय (MHA) को हो सकता है, यदि उसे विधिसम्मत रूप से अधिकृत किया गया हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद AGMUT कैडर के IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की वैधता से जुड़ा था।

एक मामले में अधिकारी के खिलाफ आरोपों के आधार पर गृह मंत्रालय ने जांच शुरू की और अंततः सेवा से हटाने का आदेश पारित किया। दूसरे मामले में केवल आरोपपत्र जारी हुआ था।

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अधिकारियों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी, यह कहते हुए कि गृह मंत्रालय के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

CAT ने उनकी बात मानते हुए कहा कि केवल संबंधित राज्य सरकार या संयुक्त कैडर प्राधिकरण (JCA) ही कार्रवाई कर सकता है।

हाईकोर्ट ने विस्तृत कानूनी विश्लेषण करते हुए कहा कि:

“संयुक्त कैडर के मामलों में अनुशासनात्मक शक्ति किसी एक राज्य में नहीं, बल्कि सभी राज्यों के सामूहिक ढांचे में निहित होती है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया:

“1969 के नियमों में ‘State Government concerned’ का अर्थ संयुक्त कैडर के संदर्भ में सभी राज्यों की सामूहिक इकाई है, जिसे एक प्रतिनिधि के माध्यम से लागू किया जा सकता है।”

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कोर्ट ने माना कि Joint Cadre Authority (JCA) इस सामूहिक इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है।

मुख्य कानूनी प्रश्न

क्या गृह मंत्रालय, जो JCA का प्रतिनिधि है, AGMUT कैडर के IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर सकता है?

अदालत ने कहा कि:

• 1954 और 1969 के नियमों को साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि संयुक्त कैडर में शक्ति सामूहिक रूप से निहित होती है।

• नियमों में यह भी प्रावधान है कि सभी राज्य मिलकर किसी एक प्राधिकरण को नामित कर सकते हैं।

• 1989 के निर्णय और 2017 की अधिसूचना के माध्यम से MHA को यह जिम्मेदारी दी गई थी।

“यह शक्ति का अवैध हस्तांतरण नहीं, बल्कि नियमों के तहत वैध अधिकृत प्रतिनिधित्व है।”

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अदालत ने कहा:

“यह sub-delegation का मामला नहीं है, बल्कि नियमों के भीतर मान्यता प्राप्त अधिकृत व्यवस्था है।”

इसलिए “delegatus non potest delegare” सिद्धांत यहाँ लागू नहीं होगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने CAT के आदेश को गलत ठहराते हुए कहा कि गृह मंत्रालय, संयुक्त कैडर के प्रतिनिधि के रूप में, अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सक्षम है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि MHA द्वारा शुरू की गई और पूरी की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही विधिसम्मत है।

Case Details

Case Title: Union of India & Ors vs Padma Jaiswal IAS & connected matters

Case Number: W.P.(C) 6699/2018 & connected petitions

Judge: Justice Anil Kshetrapal, Justice Amit Mahajan

Decision Date: 01 April 2026

Counsels:

• For Petitioners: Sr. Adv. Sanjay Jain and team

• For Respondents: Sr. Adv. Nidhesh Gupta and others

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