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मुवक्किल तय की गई कानूनी फीस का भुगतान साबित करने में नाकाम रहा; दिल्ली हाई कोर्ट ने वकील के ₹36,000 के काउंटरक्लेम को सही ठहराया।

Shivam
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दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रेम सिंह की दूसरी अपील खारिज कर दी और वकील सी.एस. राठौर के ₹36,000 की प्रोफेशनल फीस के दावे को सही ठहराया, क्योंकि तय की गई कानूनी फीस का भुगतान नहीं किया गया था। - प्रेम सिंह बनाम सी.एस. राठौर

मुवक्किल तय की गई कानूनी फीस का भुगतान साबित करने में नाकाम रहा; दिल्ली हाई कोर्ट ने वकील के ₹36,000 के काउंटरक्लेम को सही ठहराया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील और उसके पूर्व मुवक्किल के बीच पेशेवर फीस को लेकर चले लंबे विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुवक्किल की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वकील को तय की गई पेशेवर फीस का भुगतान किया गया था। इसी आधार पर अदालत ने वकील सी.एस. राठौर के ₹36,000 के काउंटर क्लेम (प्रतिदावा) को बरकरार रखा।

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने 3 जून 2026 को यह फैसला सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला प्रेम सिंह और अधिवक्ता सी.एस. राठौर के बीच फीस विवाद से जुड़ा है। प्रेम सिंह ने अपनी नौकरी समाप्त किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी ओर से सी.एस. राठौर ने पैरवी की थी। बाद में अदालत के आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका भी दाखिल की गई।

अवमानना कार्यवाही के दौरान कंपनी ने ₹80,000 का भुगतान किया। प्रेम सिंह का आरोप था कि इस राशि में से ₹20,000 का डिमांड ड्राफ्ट तो उन्हें मिल गया, लेकिन ₹60,000 नकद राशि, जो उनके वकील ने अदालत में उनकी ओर से प्राप्त की थी, उन्हें कभी नहीं सौंपी गई।

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इसके बाद उन्होंने ₹60,000 की वसूली के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया।

सी.एस. राठौर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि प्रेम सिंह ने उनकी पेशेवर फीस का भुगतान नहीं किया था। उनके अनुसार, रिट याचिका के लिए ₹25,000 और अवमानना याचिका के लिए ₹11,000 फीस तय हुई थी। इसी आधार पर उन्होंने ₹36,000 की वसूली के लिए काउंटर क्लेम दायर किया।

ट्रायल कोर्ट ने माना कि ₹60,000 की नकद राशि प्रेम सिंह को वापस किए जाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। इसलिए अदालत ने प्रेम सिंह के पक्ष में ₹60,000 की डिक्री पारित कर दी। हालांकि, वकील का काउंटर क्लेम खारिज कर दिया गया था।

बाद में अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के इस निष्कर्ष को बरकरार रखा कि प्रेम सिंह ₹60,000 पाने के हकदार हैं। लेकिन अदालत ने यह भी पाया कि वकील की ₹36,000 की पेशेवर फीस का भुगतान नहीं हुआ था। इसलिए काउंटर क्लेम स्वीकार करते हुए फीस की राशि को प्रेम सिंह के पक्ष में पारित डिक्री से समायोजित करने का आदेश दिया गया।

इसी आदेश को प्रेम सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि कुल ₹36,000 फीस तय हुई थी।

अदालत ने कहा कि यह सही है कि सी.एस. राठौर को प्राप्त मुआवजे की राशि में से अपनी फीस समायोजित कर शेष रकम प्रेम सिंह को लौटानी चाहिए थी। हालांकि, इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि प्रेम सिंह यह साबित नहीं कर सके कि उन्होंने फीस का भुगतान किया था।

अदालत ने कहा,

“वास्तविकता यह है कि अपीलकर्ता कोई भी ऐसा साक्ष्य पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि पेशेवर फीस का भुगतान किया गया था।”

न्यायालय ने यह भी पाया कि प्रेम सिंह ने अपने दावों में कहीं यह नहीं बताया कि फीस कब और किस प्रकार अदा की गई थी।

फैसले में कहा गया कि विवाद केवल फीस बिल के प्रमाणित होने का नहीं था, बल्कि यह देखने का था कि तय फीस वास्तव में चुकाई गई थी या नहीं। उपलब्ध मौखिक साक्ष्यों से यह साबित होता है कि फीस का भुगतान नहीं हुआ था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि अपीलीय अदालत ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था और उसके निष्कर्षों में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं बनता, जिस पर दूसरे अपील अधिकार क्षेत्र का उपयोग किया जाए।

इसी के साथ हाईकोर्ट ने प्रेम सिंह की दूसरी अपील खारिज कर दी और अधिवक्ता सी.एस. राठौर के ₹36,000 के पेशेवर फीस संबंधी काउंटर क्लेम को बरकरार रखा। लंबित सभी आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

Case Details:

Case Title: Prem Singh v. C.S. Rathore

Case Number: RSA 91/2025

Judge: Justice Neena Bansal Krishna

Decision Date: 03 June 2026

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