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दिल्ली हाईकोर्ट ने NHAI का टोल कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेशन बरकरार रखा, ‘विंडफॉल गेन’ और सार्वजनिक राजस्व को बताया अहम आधार

Shivam
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दिल्ली हाईकोर्ट ने NHAI द्वारा टोल कॉन्ट्रैक्ट समाप्त करने को वैध माना, कहा कि अनुबंध शर्तों के तहत लिया गया निर्णय न्यायिक समीक्षा में हस्तक्षेप योग्य नहीं। - मोहम्मद करीमुन्निसा बनाम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य।

दिल्ली हाईकोर्ट ने NHAI का टोल कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेशन बरकरार रखा, ‘विंडफॉल गेन’ और सार्वजनिक राजस्व को बताया अहम आधार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा टोल कलेक्शन कॉन्ट्रैक्ट को समय से पहले समाप्त करने के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि जब अनुबंध में स्पष्ट रूप से समाप्ति का अधिकार दिया गया हो, तो ठेकेदार इसे चुनौती देकर अनुबंध जारी रखने का दावा नहीं कर सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता एमडी. करीमुन्निसा ने NHAI द्वारा 8 अप्रैल 2026 को जारी टर्मिनेशन आदेश और 2 अप्रैल 2026 के शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी थी। यह कॉन्ट्रैक्ट महाराष्ट्र के पावनगांव टोल प्लाजा पर एक वर्ष के लिए दिया गया था, जो जून 2026 तक वैध था।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि कॉन्ट्रैक्ट समाप्त करना मनमाना और पूर्व-नियोजित था, क्योंकि किसी तरह का उल्लंघन नहीं हुआ था और ‘विंडफॉल गेन’ की शर्त भी लागू नहीं होती थी।

दूसरी ओर, NHAI ने अदालत को बताया कि टोल कलेक्शन में लगातार भारी वृद्धि हो रही थी, जिससे सार्वजनिक खजाने को प्रतिदिन लगभग ₹7.5 लाख का नुकसान हो रहा था।

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डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि संविदात्मक मामलों में न्यायिक समीक्षा सीमित होती है। अदालत केवल यह देखती है कि निर्णय प्रक्रिया में कोई मनमानी, पक्षपात या कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

अदालत ने कहा,

“जब अनुबंध में समाप्ति का अधिकार निहित है, तो ठेकेदार को यह दावा नहीं हो सकता कि वह पूरे कार्यकाल तक जारी रहेगा।”

कोर्ट ने यह भी माना कि टोल कलेक्शन में भारी वृद्धि (जैसा कि पेज 5 की तालिका में दर्शाया गया है) 40% से अधिक सीमा पार कर चुकी थी, जिससे ‘विंडफॉल गेन’ की स्थिति बनती है।

अदालत ने यह भी जोड़ा कि ठेकेदार एक अनुभवी व्यावसायिक इकाई है और उसने सभी शर्तों को समझकर ही अनुबंध स्वीकार किया था।

कोर्ट ने कहा कि:

• NHAI को अनुबंध के क्लॉज 35(2) और 35(6) के तहत समाप्ति का अधिकार है।

• याचिकाकर्ता को नोटिस, जवाब देने और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया।

• केवल आर्थिक नुकसान या व्यावसायिक कठिनाई के आधार पर संविदात्मक निर्णय को चुनौती नहीं दी जा सकती।

अदालत ने यह भी माना कि समानांतर रूप से नया टेंडर जारी करना प्रशासनिक तैयारी का हिस्सा है, न कि पूर्व-निर्धारित निर्णय का प्रमाण।

कोर्ट ने याचिका को “बिना मेरिट” बताते हुए खारिज कर दिया और NHAI के टर्मिनेशन आदेश को वैध ठहराया। साथ ही, सभी लंबित आवेदन भी समाप्त कर दिए गए।

Case Details

Case Title: Md. Karimunnisa vs National Highways Authority of India & Anr.

Case Number: W.P.(C) 4817/2026

Judge: Justice Anil Kshetrapal & Justice Amit Mahajan

Decision Date: 20 April 2026

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