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UPSC CSAT 2023 विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आउट ऑफ सिलेबस सवालों की दलील खारिज

Vivek G.
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हनुमंत लाल पटेल और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य। दिल्ली हाईकोर्ट ने UPSC CSAT 2023 विवाद में आउट ऑफ सिलेबस सवालों के आरोप खारिज किए, कहा विशेषज्ञों के फैसले में कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा।

UPSC CSAT 2023 विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आउट ऑफ सिलेबस सवालों की दलील खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 के CSAT पेपर से जुड़े विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने उन अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि परीक्षा में पूछे गए कुछ प्रश्न तय सिलेबस से बाहर थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र तैयार करना विशेषज्ञों का क्षेत्र है और न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 के पेपर-II (CSAT) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता, जो इस परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे, ने दावा किया कि लगभग 11 प्रश्न सिलेबस से बाहर थे। उनका कहना था कि परीक्षा नियमों में यह स्पष्ट है कि गणित और डेटा इंटरप्रिटेशन से जुड़े प्रश्न कक्षा 10 स्तर के होने चाहिए, जबकि प्रश्न कक्षा 11 और 12 के स्तर के थे।

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याचिकाकर्ताओं ने पहले UPSC के शिकायत पोर्टल पर आपत्ति दर्ज कराई। बाद में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से उन्हें हाईकोर्ट जाने की छूट मिली। इसके बाद मामला केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) पहुंचा, जहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

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याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों से परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। उन्होंने अदालत को बताया कि कई अभ्यर्थियों का यह अंतिम प्रयास था और ऐसे प्रश्नों से उन्हें नुकसान हुआ।

उनकी ओर से यह भी कहा गया कि CAT ने प्रश्नों की स्वतंत्र जांच नहीं की और सिर्फ सामान्य आधार पर याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ताओं ने संशोधित मेरिट सूची बनाने, मुख्य परीक्षा दोबारा कराने या अतिरिक्त प्रयास व आयु सीमा में छूट देने की मांग की।

UPSC की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रश्नपत्र विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया था और परीक्षा के बाद आपत्तियों की समीक्षा अलग विशेषज्ञ समिति ने की।

UPSC के वकील ने कहा, “विशेषज्ञ समिति ने सभी प्रश्नों की जांच कर यह निष्कर्ष निकाला कि वे तय सिलेबस के भीतर थे।”

साथ ही यह भी कहा गया कि पूरी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सफल उम्मीदवारों की नियुक्तियां भी हो चुकी हैं। ऐसे में परिणाम बदलना व्यावहारिक नहीं होगा।

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अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति अमित महाजन और न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल की पीठ ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित होता है।

पीठ ने कहा, “अदालत परीक्षक या विशेषज्ञ के फैसले के स्थान पर अपना मत नहीं रख सकती। हस्तक्षेप तभी संभव है जब प्रक्रिया में दुर्भावना, मनमानी या स्पष्ट अवैधता साबित हो।”

अदालत ने यह भी माना कि UPSC द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने आपत्तियों पर विचार कर साफ कहा है कि सभी प्रश्न सिलेबस के भीतर थे और गणित के प्रश्न कक्षा 10 स्तर से आगे नहीं थे।

पीठ ने यह भी कहा कि केवल विशेषज्ञों के निष्कर्ष से असहमति जताना न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बन सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने उन सफल उम्मीदवारों को पक्षकार नहीं बनाया, जिनकी नियुक्तियां प्रभावित हो सकती थीं। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के अधिकारों पर असर डालने वाला आदेश उसके बिना सुनवाई के नहीं दिया जा सकता।

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अदालत का अंतिम फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि CAT के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा 2023 की पूरी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अतिरिक्त प्रयास या आयु में छूट देने का आदेश देना भी न्यायिक क्षेत्र से बाहर है।

इसके साथ ही अदालत ने याचिका खारिज कर दी और लंबित सभी आवेदन भी समाप्त कर दिए।

Case Title: Hanumant Lal Patel & Ors. vs Union of India & Ors.

Case No.: W.P.(C) 4354/2025

Decision Date: 03 February 2026

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