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दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कुंडली’ का हवाला देकर शादी से इनकार मामले में आरोपी की जमानत खारिज की

Vivek G.
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जयंत वत्स बनाम राज्य (एनसीटी दिल्ली), दिल्ली हाईकोर्ट ने शादी के झूठे वादे और कुंडली विवाद में दुष्कर्म आरोपी की जमानत खारिज की, कहा-प्रथम दृष्टया धोखे के संकेत।

दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कुंडली’ का हवाला देकर शादी से इनकार मामले में आरोपी की जमानत खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप वाले एक मामले में आरोपी को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड यह दिखाता है कि विवाह का आश्वासन बार-बार दिया गया, जबकि बाद में उसी आधार को नकार दिया गया।

यह आदेश जस्टिस डॉ. स्वर्णा कांत शर्मा ने 17 फरवरी 2026 को सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एफआईआर नंबर 01/2026 से जुड़ा है, जो दिल्ली के केशव पुरम थाने में दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता 27 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने कई वर्षों तक शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

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शिकायत के अनुसार, दोनों 2018 से एक-दूसरे को जानते थे। महिला का कहना था कि आरोपी ने न सिर्फ शादी का वादा किया, बल्कि उसे अपने परिवार से भी मिलवाया और भविष्य की पत्नी के रूप में पेश किया।

बाद में आरोपी ने यह कहकर शादी से इनकार कर दिया कि दोनों की “कुंडली” मेल नहीं खाती। महिला ने आरोप लगाया कि पहले भी उसने शिकायत की थी, लेकिन आरोपी और उसके परिवार के आश्वासन पर उसे वापस ले लिया। जब विवाह की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब दोबारा शिकायत दर्ज कराई गई।

अदालत में क्या दलीलें दी गईं?

आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यह संबंध पूरी तरह सहमति से था और दोनों लगभग आठ वर्षों से रिश्ते में थे। उन्होंने कहा कि शादी न हो पाने की वजह केवल कुंडली का न मिलना था, न कि कोई धोखा।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत को व्हाट्सऐप चैट्स का हवाला दिया। उनका कहना था कि इन संदेशों में आरोपी ने खुद यह कहा था कि कुंडली मिल चुकी है और शादी में कोई बाधा नहीं है।

राज्य की ओर से भी जमानत का विरोध किया गया। अभियोजन ने कहा कि जांच अभी जारी है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

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अदालत की टिप्पणियां

अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद शिकायत, बयान और चैट संदेशों को देखते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह दिखता है कि आरोपी ने कई बार विवाह का आश्वासन दिया।

पीठ ने कहा, “यदि कुंडली मिलान इतना निर्णायक था, तो यह मुद्दा शारीरिक संबंध बनाने से पहले स्पष्ट होना चाहिए था।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी ने एक चैट में लिखा था-“कल ही शादी कर रहे हैं हम”-जो यह संकेत देता है कि विवाह में किसी बाधा का उल्लेख उस समय नहीं था।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल रिश्ते के टूटने से आपराधिक मामला नहीं बनता। लेकिन यदि शुरुआत से या बार-बार झूठा आश्वासन देकर सहमति ली गई हो, तो मामला अलग हो सकता है।

अदालत ने कहा कि इस स्तर पर उपलब्ध सामग्री यह संकेत देती है कि विवाह का आश्वासन लगातार दिया गया और उसी आधार पर संबंध बनाए गए।

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फैसला

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और इस तथ्य को देखते हुए कि अभी आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ है, आरोपी को नियमित जमानत देने का आधार नहीं बनता।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह टिप्पणियां केवल जमानत अर्जी पर निर्णय के लिए हैं और मामले के अंतिम ट्रायल पर इनका प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इसी के साथ जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

Case Title: Jayant Vats vs State (NCT of Delhi)

Case No.: BAIL APPLN. 422/2026

Decision Date: 17 February 2026

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