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दिल्ली हाईकोर्ट: गवाह को दोबारा बुलाने की सीमा तय, नए आरोप जोड़ने के लिए मुख्य बयान दोबारा खोलने से किया इनकार

Shivam
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि गवाह को दोबारा बुलाने की शक्ति सीमित है और नए आरोप जोड़ने के लिए मुख्य बयान दोबारा नहीं खोला जा सकता। - मीनाक्षी गौतम बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य।

दिल्ली हाईकोर्ट: गवाह को दोबारा बुलाने की सीमा तय, नए आरोप जोड़ने के लिए मुख्य बयान दोबारा खोलने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामलों में गवाह को दोबारा बुलाने (recall) की शक्ति असीमित नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि गवाह पहले ही मुख्य बयान (examination-in-chief) दे चुका है, तो उसे बार-बार नए आरोप जोड़ने के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला मीनाक्षी गौतम बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य। से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे केवल जिरह (cross-examination) के लिए बुलाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन आगे मुख्य बयान देने की इजाजत नहीं दी गई।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि उसके साथ विवाह के बाद क्रूरता और उत्पीड़न हुआ, और कई महत्वपूर्ण तथ्य पहले जांच और बयान में शामिल नहीं किए गए। उसने अदालत से आग्रह किया कि उसे दोबारा मुख्य बयान देने का अवसर दिया जाए ताकि वह सभी घटनाओं को रिकॉर्ड में ला सके।

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याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पहले की जांच अधूरी थी और कई घटनाएं रिकॉर्ड नहीं हुईं, इसलिए आगे बयान देना न्याय के लिए आवश्यक है।

वहीं प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही दो बार अपना मुख्य बयान दे चुकी है और बाद में जिरह के लिए उपस्थित नहीं हुई, जिसके कारण उसे गवाह सूची से हटा दिया गया था। ऐसे में फिर से मुख्य बयान की अनुमति देना आरोपियों के लिए अनुचित होगा।

न्यायमूर्ति डॉ. स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा,

“धारा 311 CrPC का उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है, लेकिन इसका उपयोग पुराने बयान को अनिश्चित रूप से फिर से खोलने के लिए नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता का मुख्य बयान वर्ष 2012 और 2014 में रिकॉर्ड हो चुका था, और उस समय उसने कई आरोप नहीं लगाए थे।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि इस स्तर पर फिर से मुख्य बयान की अनुमति दी जाती है, तो यह “पुराने साक्ष्य को दोबारा खोलने” जैसा होगा, जो सामान्यतः स्वीकार्य नहीं है।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता उचित उपाय (जैसे धारा 311 CrPC) अपना सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर स्थिति में नया मुख्य बयान देना अनिवार्य रूप से अनुमति दी जाएगी।

अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट का आदेश संतुलित और न्यायसंगत है। गवाह को केवल जिरह के लिए बुलाने की अनुमति देना उचित है ताकि पहले से रिकॉर्ड साक्ष्य पर विचार हो सके, लेकिन नए आरोप जोड़ने के लिए मुख्य बयान दोबारा खोलना उचित नहीं होगा।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।

Case Details

Case Title: Meenakshi Gautam vs State of NCT of Delhi & Anr.

Case Number: CRL.M.C. 2325/2026 (with CRL.M.A. 9469/2026)

Judge: Hon’ble Dr. Justice Swarana Kanta Sharma

Decision Date: 15 April 2026

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